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Report by: Yogendra Singh

Bhopal : चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल भक्ति और संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आई। अवसर था विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ पर आयोजित ‘विक्रमोत्सव 2026’ का। रवींद्र भवन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान ‘कोटि सूर्योपासना’ और सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली जीवन पर आधारित विशेष नाट्य मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्यमंत्री ने मंच पर अपनी कला का जादू बिखेरने वाले कलाकारों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

सनातन संस्कृति और सृष्टि के आरंभ का पर्व

Bhopal मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की बधाई देते हुए इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विक्रम संवत् केवल एक कैलेंडर का बदलाव नहीं है, बल्कि यह उस अमृत बेला का उत्सव है जब सृष्टि का आरंभ हुआ था। भोपाल के आकाश के नीचे जब पारंपरिक विधि-विधान से ब्रह्म ध्वज की स्थापना की गई, तो मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। उन्होंने आह्वान किया कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सनातन परंपराओं पर गर्व करना चाहिए।

सम्राट विक्रमादित्य की विरासत का पुनरुद्धार

Bhopal अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उज्जैन के महान अधिपति सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सरकार राज्य के गौरवशाली अतीत को सहेजने और उसे वैश्विक पटल पर लाने के लिए संकल्पित है। सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया:

  • सम्राट विक्रमादित्य रिसर्च सेंटर: इतिहास के अनछुए पहलुओं और विक्रमादित्य के सुशासन पर शोध के लिए इस विशेष केंद्र का निर्माण किया जा रहा है।
  • वैदिक घड़ी का नवाचार: भारतीय काल-गणना की वैज्ञानिक सटीकता को दुनिया के सामने रखने के लिए वैदिक घड़ी की स्थापना जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं।
  • ऐतिहासिक संरक्षण: शौर्य गाथाओं और प्राचीन स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: सुशासन और न्याय की प्रेरणा

Bhopal मुख्यमंत्री ने ‘विक्रमोत्सव 2026’ को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का न्यायप्रिय शासन आज भी आधुनिक लोकतंत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। रवींद्र भवन में हुए नाट्य मंचन के माध्यम से उनकी वीरता को जिस जीवंतता के साथ दर्शाया गया, उसकी मुख्यमंत्री ने मुक्त कंठ से सराहना की।

ब्रह्म ध्वज की स्थापना और सूर्य की पहली किरणों के वंदन के साथ शुरू हुआ यह उत्सव न केवल भोपाल बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश अब अपने “स्वर्णिम अतीत” को आधुनिकता के साथ जोड़कर विकास की एक नई इबारत लिख रहा है।

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