Report by: Ishu Kumar
Ayodhya : चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत् 2083) के शुभ अवसर पर धर्मनगरी अयोध्या एक बार फिर एक महान ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना की साक्षी बनी। गुरुवार को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ‘श्रीराम यंत्र’ की प्राण-प्रतिष्ठा की। इस पुनीत अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राष्ट्र की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

रामलला के दरबार में राष्ट्रपति की आस्था
Ayodhya समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रामलला के भव्य विग्रह के दर्शन किए और विशेष आरती उतारी। राष्ट्रपति ने न केवल मुख्य गर्भगृह में शीश नवाया, बल्कि मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा-अर्चना की। उन्होंने राम मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई सूक्ष्म नक्काशी, अद्भुत कलाकृतियों और भारतीय वास्तुकला के बेजोड़ नमूनों का अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने मंदिर के निर्माण कार्य और इसकी भव्यता की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति का गौरव बताया।
‘श्रीराम यंत्र’: विशेषता और आध्यात्मिक महत्व
Ayodhya मंदिर के दूसरे तल पर प्रतिष्ठित किया गया ‘श्रीराम यंत्र’ अत्यंत विशिष्ट और ऊर्जामय माना जाता है। इसके महत्व के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ऐतिहासिक आगमन: यह यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज के सानिध्य में एक भव्य शोभायात्रा के जरिए अयोध्या पहुँचाया गया था।
- वैज्ञानिक एवं धार्मिक आधार: वैदिक गणित और जटिल ज्यामितीय आकृतियों से निर्मित इस यंत्र को साक्षात् देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह यंत्र ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा को संचित करने की अद्भुत क्षमता रखता है।
- वैदिक अनुष्ठान: इसकी प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के प्रकांड विद्वानों द्वारा पिछले नौ दिनों से अनवरत विशेष वैदिक अनुष्ठान और जप किए जा रहे थे।
संतों और गणमान्य विभूतियों का समागम
Ayodhya इस पावन प्रतिष्ठापना समारोह में अध्यात्म जगत की कई महान विभूतियों ने शिरकत की। मां अमृतानंदमयी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। साथ ही, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और सदस्य गोपाल जी सहित कई पूज्य संत इस अनुष्ठान के साक्षी बने।
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना ने न केवल मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को पूर्णता प्रदान की है, बल्कि करोड़ों राम भक्तों के उत्साह को भी द्विगुणित कर दिया है। पूरी अयोध्या नगरी इस समय ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान है और श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
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