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Report by: Dinanath Mauar

Aurangabad : बिहार के औरंगाबाद जिले से मानवता और न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने समाज के लिए एक नई नजीर पेश की है। एक साल पहले जिस युवक पर नाबालिग को भगाने का संगीन आरोप लगा था और जो सलाखों के पीछे दिन काट रहा था, आज वही युवक अपनी प्रेमिका के साथ शादी के बंधन में बंध गया। इस पूरी कानूनी लड़ाई और मिलन की सबसे खास बात यह रही कि उनकी 9 महीने की मासूम बेटी खुद अपने माता-पिता की शादी की गवाह बनी।

दिल्ली से बरामदगी और जेल की सलाखों तक का सफर

Aurangabad मामले की शुरुआत तब हुई जब परिजनों ने एक युवक पर नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के आठ दिन बाद ही दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। कानून के मुताबिक, लड़की नाबालिग थी, इसलिए पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और लड़की को सुरक्षित उसके परिजनों को सौंप दिया गया।

हालांकि, कहानी में मोड़ तब आया जब बरामदगी के बाद पता चला कि लड़की गर्भवती है। सामाजिक लोकलाज की परवाह किए बिना लड़की ने बच्चे को जन्म देने का साहसिक फैसला किया। वक्त गुजरता गया, प्रेमी जेल में रहा और इधर लड़की बालिग हो गई और उसने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया।

‘कुंवारी मां’ का संघर्ष और कोर्ट का मानवीय रुख

Aurangabad बेटी के जन्म के बाद असली संघर्ष शुरू हुआ। लड़की अपनी मासूम बच्ची को पिता का नाम दिलाना चाहती थी और खुद पर लगे ‘कुंवारी मां’ के सामाजिक दंश को मिटाना चाहती थी। उसने हार नहीं मानी और अपने प्रेमी (बच्ची के पिता) को जेल से रिहा कराने और उससे शादी करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने एक अत्यंत मानवीय और सराहनीय रुख अख्तियार किया। अदालत ने प्रस्ताव रखा कि यदि दोनों पक्ष (लड़का और लड़की के परिजन) शादी के लिए तैयार हैं और बच्चे को राजी-खुशी स्वीकार करने का ‘एकरारनामा’ (Agreement) कोर्ट में जमा करते हैं, तो लड़के की जमानत और शादी का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

मंदिर में हुई शादी, गोद में बेटी लेकर विदा हुई दुल्हन

Aurangabad अदालत के आदेश पर दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एकरारनामा तैयार कर कोर्ट को सौंपा। इसके बाद करीब 8 महीने से जेल में बंद युवक को जमानत मिल गई। जेल से रिहा होते ही आज कोर्ट परिसर स्थित महावीर मंदिर में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं और परिजनों की मौजूदगी में हिंदू रीति-रिवाज से शादी संपन्न हुई।

इस विवाह के सबसे भावुक क्षण तब देखने को मिले जब दुल्हन की गोद में खेल रही 9 महीने की बेटी अपने माता-पिता के फेरों की गवाह बनी। मौके पर अधिवक्ता नरेंद्र सिंह, लड़के के पिता और लड़की की मां गवाह के तौर पर मौजूद रहे। शादी के बाद नवदंपति अपनी नन्ही जान को गोद में लिए एक नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए अपने घर रवाना हुए।

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