
इस्लामाबाद: भारत के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और जवाबी कार्रवाई में हुए नुकसान के बाद पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में, पाकिस्तान सरकार के आर्थिक मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से एक ट्वीट किया गया, जिसमें “दुश्मन” (स्पष्ट रूप से भारत का संदर्भ) से हुए भारी नुकसान के बाद अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों से वित्तीय मदद की गुहार लगाई गई।
ट्वीट में कहा गया, “पाकिस्तान सरकार ने दुश्मन द्वारा किए गए भारी नुकसान के बाद अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों से अधिक ऋण की अपील की है। बढ़ते युद्ध और स्टॉक में गिरावट के बीच, हम अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों से तनाव कम करने में मदद करने का आग्रह करते हैं।” इस पोस्ट में पाकिस्तान की नाजुक आर्थिक स्थिति और युद्ध के कारण बढ़ते दबाव का हवाला दिया गया था।
यह ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिस पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि जो देश कुछ दिन पहले परमाणु हमले की धमकी दे रहा था, वह अब अपनी रक्षा के लिए भीख मांग रहा है। लोगों ने पाकिस्तान के विरोधाभासी रवैये पर सवाल उठाए और इसे उसकी अंदरूनी कमजोरी का प्रमाण बताया।
हालांकि, इस घटना में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब कुछ ही मिनटों बाद पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक और बयान जारी किया गया। इस बयान में दावा किया गया कि पाकिस्तान सरकार के आर्थिक मामलों के मंत्रालय का एक्स अकाउंट हैक हो गया था और वह ट्वीट हैकर्स द्वारा पोस्ट किया गया था।
इस स्पष्ट खंडन के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई। कई लोगों ने पाकिस्तान सरकार के हैकिंग के दावे को सिरे से खारिज कर दिया और इसे अपनी बेइज्जती छिपाने का एक प्रयास बताया। कुछ यूजर्स ने व्यंग्यात्मक टिप्पणियां भी कीं, जिसमें कहा गया कि शायद मदद न मिलने और बदनामी होने के बाद सरकार ने हैकिंग का बहाना बनाया है।
यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान सरकार का अकाउंट हैक होने का दावा सच है या यह वास्तव में वित्तीय सहायता की निराशाजनक अपील थी जिसे बाद में पलटा गया। सच्चाई जो भी हो, इस घटना ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को और धूमिल किया है और उसकी आर्थिक तथा राजनीतिक अस्थिरता को उजागर किया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे प्रकरण की वास्तविकता क्या है और इसका पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
