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by-Ravindra Sikarwar

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हाल ही में भारत-यूके के बीच शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की, जिसमें नौ प्रमुख ब्रिटिश विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। यह कदम न केवल भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा घरेलू स्तर पर उपलब्ध कराएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में सहयोग को भी बढ़ावा देगा। यह घोषणा स्टार्मर की भारत यात्रा के दौरान मुंबई में आयोजित सीईओ समिट और द्विपक्षीय वार्ताओं के बाद की गई, जो जुलाई 2025 में मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान अपनाई गई ‘भारत-यूके विजन 2030’ रोडमैप का हिस्सा है।

घोषणा का संदर्भ: स्टार्मर की भारत यात्रा और द्विपक्षीय वार्ताएं
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 8-9 अक्टूबर 2025 को अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर मुंबई पहुंचे, जहां उनके साथ 125 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल था। यह प्रतिनिधिमंडल ब्रिटेन के शीर्ष उद्योगपतियों, उद्यमियों और शिक्षा विशेषज्ञों से युक्त था, जो शिक्षा क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावशाली समूह माना जा रहा है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य जुलाई 2025 में लंदन में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लागू करने के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा और शिक्षा सहयोग को मजबूत करना था।

मुंबई में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा, “रक्षा और सुरक्षा से लेकर शिक्षा और नवाचार तक, भारत-यूके संबंधों में नई आयाम जुड़ रहे हैं। आज स्टार्मर के साथ आए शिक्षा प्रतिनिधिमंडल ने यह साबित कर दिया कि दोनों देश शिक्षा के क्षेत्र में कैसे साझा लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं।” स्टार्मर ने भी इस कदम को सराहते हुए कहा, “ब्रिटेन भारत का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा प्रदाता बनेगा, जो विजन 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा योगदान होगा।” विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने एक विशेष ब्रीफिंग में इसे ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत हो रही शांत क्रांति’ करार दिया।

भाग लेने वाले विश्वविद्यालय और कैंपस स्थान:
यह पहल भारत की नई शिक्षा नीति 2020 के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में कैंपस खोलने की अनुमति प्रदान करने का प्रत्यक्ष परिणाम है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन नौ ब्रिटिश संस्थानों को मंजूरी प्रदान की है, जो प्रमुख भारतीय शहरों में फैले होंगे। इन कैंपसों में यूके के डिग्री प्रोग्राम उपलब्ध होंगे, जो छात्रों को विदेश जाने के बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का अवसर देंगे। प्रमुख विश्वविद्यालयों के कैंपसों की योजना निम्नलिखित है:

  • साउथैम्पटन विश्वविद्यालय: गुरुग्राम (हरियाणा) में कैंपस पहले ही चालू हो चुका है, और पहला बैच छात्रों ने प्रवेश ले लिया है। यह इंजीनियरिंग, विज्ञान और व्यवसाय प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर फोकस करेगा।
  • ब्रिस्टल विश्वविद्यालय: मुंबई (महाराष्ट्र) में एंटरप्राइज कैंपस, जो ग्रीष्मकाल 2026 से छात्रों का स्वागत करेगा। यह उद्यमिता और नवाचार पर केंद्रित होगा।
  • लिवरपूल विश्वविद्यालय: बैंगलोर (कर्नाटक) में प्रस्तावित कैंपस, जो चिकित्सा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कोर्स प्रदान करेगा।
  • लैंकेस्टर विश्वविद्यालय: बैंगलोर में एक नया कैंपस स्थापित करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह व्यवसाय और सामाजिक विज्ञान पर जोर देगा।
  • सरे विश्वविद्यालय: गुजरात के गिफ्ट सिटी में इन-प्रिंसिपल मंजूरी प्राप्त, जो वित्त और प्रौद्योगिकी शिक्षा को बढ़ावा देगा।
  • यॉर्क विश्वविद्यालय: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रस्तावित, जो कला, मानविकी और पर्यावरण अध्ययन पर फोकस करेगा।
  • एबरडीन विश्वविद्यालय: हैदराबाद (तेलंगाना) में कैंपस, ऊर्जा और स्वास्थ्य विज्ञान क्षेत्रों में विशेषज्ञता के साथ।
  • अन्य दो विश्वविद्यालयों के नाम जल्द ही घोषित किए जाएंगे, लेकिन ये सभी प्रमुख ब्रिटिश संस्थान होंगे जो भारत के प्रमुख शहरों जैसे चेन्नई, पुणे और अहमदाबाद में फैलेंगे।

ये कैंपस कुल मिलाकर हजारों नौकरियां पैदा करेंगे और भारतीय छात्रों को कम लागत में यूके की गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करेंगे।

लाभ: छात्रों, अनुसंधान और अर्थव्यवस्था के लिए नया अवसर
यह पहल भारतीय छात्रों के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि उन्हें विदेश यात्रा के खर्च और वीजा जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी। पीएम मोदी ने कहा, “यह कदम भारतीय युवाओं को वैश्विक शिक्षा से जोड़ेगा, बिना उन्हें देश छोड़ने की जरूरत पड़े।” कैंपसों में यूके के पाठ्यक्रम, फैकल्टी और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो सहयोगी परियोजनाओं को जन्म देगी।

  • शिक्षा और कौशल विकास: छात्रों को अंतरराष्ट्रीय डिग्री मिलेगी, जो रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगी। यह अकादमिक-उद्योग साझेदारी को प्रोत्साहित करेगा, विशेष रूप से आईटी, स्वास्थ्य और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में।
  • अनुसंधान और नवाचार: भारत-यूके संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं बढ़ेंगी, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सतत विकास पर केंद्रित होंगी।
  • आर्थिक प्रभाव: ब्रिटेन के लिए यह 32 अरब पाउंड के निर्यात राजस्व का स्रोत बनेगा, जबकि भारत में हजारों उच्च-कुशल नौकरियां पैदा होंगी। स्टार्मर ने कहा, “यह निवेश दोनों देशों के भविष्य के क्षेत्रों में हजारों नौकरियां सृजित करेगा।”

पृष्ठभूमि: भारत-यूके विजन 2030 और FTA का योगदान
यह घोषणा जुलाई 2025 में पीएम मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान अपनाई गई ‘भारत-यूके विजन 2030’ का परिणाम है, जो शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास में गहन सहयोग पर आधारित है। हाल ही में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) ने इस प्रक्रिया को गति दी है, जो 2026 से लागू होगा। स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि वीजा नीतियों पर कोई नया समझौता नहीं हो रहा, लेकिन मौजूदा FTA शिक्षा और व्यापार को बढ़ावा देगा।

भारत की NEP 2020 ने विदेशी विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया है, जिसके तहत अब तक पांच अन्य विदेशी संस्थान कैंपस खोल चुके हैं। यह कदम वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत-यूके साझेदारी को वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का आधार बनाएगा, जैसा कि मोदी ने कहा।

शिक्षा में नई क्रांति की शुरुआत:
नौ ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से शिक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात हो रहा है। यह न केवल छात्रों को सशक्त बनाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान को भी मजबूत करेगा। पीएम मोदी की दूरदर्शिता और स्टार्मर के नेतृत्व ने इस साझेदारी को नई दिशा दी है। उम्मीद है कि यह पहल जल्द ही वास्तविकता बनेगी और भारतीय युवाओं को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।