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by-Ravindra Sikarwar

जाजपुर: ओडिशा के जाजपुर जिले के बिनझारपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कांतिया गांव में खरसरोटा नदी के किनारे स्नान कर रही एक 57 वर्षीय महिला को मगरमच्छ ने अचानक हमला कर दिया और उसे तेज धारा में खींच ले गया। घटना सोमवार दोपहर लगभग 4 बजे हुई, जब पीड़िता सौदामिणी महाल नदी में नहाने गई थीं। ग्रामीणों ने चिल्लाते हुए मदद की कोशिश की, लेकिन मगरमच्छ की पकड़ से उन्हें छुड़ाने में नाकाम रहे। घटना का एक भयावह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें मगरमच्छ महिला को नदी में घसीटते हुए साफ दिखाई दे रहा है। वर्तमान में, वन विभाग, अग्निशमन दल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें महिला की तलाश में जुटी हुई हैं, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है।

घटना का पूरा विवरण:
कांतिया गांव खरसरोटा नदी के किनारे बसा एक छोटा सा ग्रामीण इलाका है, जहां नदी का पानी मानसून के बाद अभी भी उफान पर है। सौदामिणी महाल, जो गांव की एक सामान्य गृहिणी थीं, रोज की तरह दोपहर में नदी किनारे स्नान करने और बर्तन धोने गईं। नदी का यह घाट स्थानीय लोगों के बीच आम स्नान स्थल है, लेकिन हाल के दिनों में मगरमच्छों की बार-बार उपस्थिति की शिकायतें मिल रही थीं। सोमवार को जब सौदामिणी पानी में उतरीं, तो अचानक नदी से एक बड़ा मगरमच्छ प्रकट हो गया। उसने बिना किसी चेतावनी के महिला के शरीर पर हमला किया और उसे अपने जबड़ों में जकड़ लिया।

आसपास के ग्रामीणों ने चीखें सुनीं और तुरंत नदी किनारे दौड़े। एक साक्षी, नाबा किशोर महाल ने बताया, “हमने देखा कि मगरमच्छ सौदामिणी को तेजी से नदी की गहराई में खींच रहा था। हमने पत्थर फेंके और चिल्लाकर उसे भगाने की कोशिश की, लेकिन धारा इतनी तेज थी कि कोई पास नहीं पहुंच सका। सबकी आंखों के सामने वह गायब हो गई।” वायरल वीडियो में नदी के ऊपर बने पुल से ग्रामीण चिल्ला रहे हैं और हाथ-पैर मार रहे हैं, लेकिन दूरी के कारण कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप संभव नहीं हो सका। वीडियो की अवधि मात्र 20 सेकंड है, लेकिन यह दृश्य दिल दहला देने वाला है, जहां मगरमच्छ महिला को पानी के नीचे ले जाता दिख रहा है।

पुलिस के अनुसार, घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 4 बजे के आसपास हुई। बिनझारपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी ने कहा, “सूचना मिलते ही हमने तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया। लेकिन नदी की गहराई और मगरमच्छ की मौजूदगी के कारण प्रारंभिक प्रयास विफल रहे।” वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह क्षेत्र भितरकनिका नदी तंत्र से जुड़ा हुआ है, जहां नमकीन पानी के मगरमच्छों की संख्या बढ़ रही है।

बचाव अभियान और प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
घटना की सूचना मिलते ही जाजपुर जिले के वन विभाग, अग्निशमन सेवा और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। बचाव दल ने नदी में गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान चलाया, लेकिन तेज धारा और अंधेरा होने के कारण सोमवार शाम तक कोई सफलता नहीं मिली। मंगलवार सुबह से अभियान फिर से तेज कर दिया गया है, जिसमें ड्रोन कैमरों और नावों का भी उपयोग किया जा रहा है। वन अधिकारी ने बताया, “मगरमच्छ को भगाने के लिए विशेष जाल और आवाज वाले उपकरण तैनात किए गए हैं। हम आशा करते हैं कि जल्द ही महिला का पता चल जाएगा।”

प्रशासन ने ग्रामीणों को नदी किनारे जाने से सख्ती से मना किया है। जिला कलेक्टर ने एक बयान जारी कर कहा, “यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और उदाहरण है। हमने स्थानीय पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि स्नान घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराए जाएं।” साथ ही, भितरकनिका अभयारण्य से जुड़े क्षेत्रों में मगरमच्छों की निगरानी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया गया है।

क्षेत्र में मगरमच्छों का खतरा: पिछली घटनाएं:
ओडिशा के तटीय जिलों में मगरमच्छों का हमला कोई नई बात नहीं है। खरसरोटा नदी भितरकनिका नदी प्रणाली का हिस्सा है, जहां सालाना 5-6 लोग मगरमच्छों के शिकार हो जाते हैं। कुछ महीने पहले इसी नदी में एक बकरी को मगरमच्छ ने खींच लिया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी। 2023 में जाजपुर के ही बिरुपा नदी में 35 वर्षीय ज्योत्सना रानी नामक एक अन्य महिला को मगरमच्छ ने स्नान के दौरान निगल लिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बाढ़ के कारण मगरमच्छ नदी-नालों से निकलकर मानव बस्तियों के करीब आ रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं और मगरमच्छों को पकड़कर अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे बिजली की कमी और सुरक्षित स्नान स्थलों की अनुपस्थिति ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमारे गांव में नल का पानी नहीं पहुंचा है, इसलिए नदी पर ही निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन अब डर के मारे कोई जाता ही नहीं।” यह घटना न केवल सौदामिणी के परिवार को शोक में डुबो रही है, बल्कि पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर रही है। सौदामिणी के पति और बच्चे अस्पताल में प्रतीक्षा कर रहे हैं, उम्मीद की किरण पकड़े हुए।

यह दुखद हादसा ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीव सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर करता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।