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by-Ravindra Sikarwar

दोहा/वाशिंगटन: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कतर स्थित अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों से कुछ सैन्य संपत्तियों को स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। यह कदम क्षेत्र में, खासकर ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के मद्देनजर, अमेरिकी रणनीति में संभावित बदलाव का संकेत देता है।

सैटेलाइट तस्वीरों और उड़ान डेटा के विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि कतर के अल-उदीद एयरबेस से, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है, कई विमान हटाए गए हैं। 5 जून को इस एयरबेस पर लगभग 40 विमान, जिनमें C-130 हरक्यूलिस परिवहन विमान और खुफिया जेट शामिल थे, मौजूद थे। हालांकि, 19 जून तक, इन विमानों की संख्या घटकर केवल तीन रह गई है।

स्थानांतरण के प्रमुख कारण:

  • ईरान से संभावित हमले का डर: ईरान ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका इजरायल-ईरान संघर्ष में सीधे हस्तक्षेप करता है, तो वह मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। इस धमकी के मद्देनजर, अमेरिका अपने रणनीतिक सैन्य संसाधनों को संभावित हमलों से बचाने के लिए कदम उठा रहा है।
  • कर्मचारियों की सुरक्षा: कतर स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों को सतर्क रहने और एयरबेस में सीमित प्रवेश की सूचना दी है। यह संकेत देता है कि अमेरिका अपने कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।
  • लंबे अभियानों की तैयारी: हटाए गए विमानों में KC-46A पेगासस और KC-135 जैसे ईंधन भरने वाले विमान भी शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश को यूरोप ले जाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लंबी दूरी के हवाई अभियानों की तैयारी का संकेत हो सकता है, जो भविष्य में किसी बड़े सैन्य हस्तक्षेप की संभावना को दर्शाता है। यदि युद्धक विमानों में ईंधन भरने वाले इन महत्वपूर्ण विमानों पर हमला होता है, तो अमेरिका को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।

अल-उदीद एयरबेस का महत्व:
कतर का अल-उदीद एयरबेस अमेरिका के लिए मध्य पूर्व में एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अड्डा है। यह यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लिए एक अग्रिम मुख्यालय के रूप में कार्य करता है और इराक, सीरिया और अफगानिस्तान में अमेरिकी अभियानों के लिए केंद्रीय रहा है। यहाँ लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं। इस बेस से सैन्य संपत्तियों का स्थानांतरण, भले ही अस्थायी हो, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और रणनीति के पुनर्मूल्यांकन को दर्शाता है।

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य नीति में बदलाव:
यह घटना मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य नीति में एक व्यापक बदलाव का हिस्सा हो सकती है। हाल के महीनों में, अमेरिका ने इराक और सीरिया में अपने कुछ ठिकानों से भी सैनिकों और राजनयिकों को वापस बुलाया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में ईरानी समर्थित समूहों द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़े हैं। अमेरिका अब अपने संसाधनों को उन क्षेत्रों में केंद्रित कर रहा है जहाँ उन्हें कम जोखिम हो, या फिर लंबी अवधि के अभियानों के लिए तैयारी कर रहा है।

इस कदम से पता चलता है कि अमेरिका मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव को बहुत गंभीरता से ले रहा है और अपने सैन्य ठिकानों को संभावित खतरों से बचाने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है।

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