
उदयपुर: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के विरोध में उदयपुर बार एसोसिएशन ने बुधवार को शक्ति प्रदर्शन किया। वकीलों ने इस कायराना हरकत पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें जम्मू-कश्मीर में तब तक राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई है जब तक कि सभी आतंकवादियों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता।
उदयपुर के वकीलों ने कोर्ट परिसर से एक विरोध रैली निकाली, जो शहर के देहली गेट चौराहे पर पहुंची। यहां वकीलों ने मानव श्रृंखला बनाकर चौराहे को जाम कर दिया और आतंकवाद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद, वे जिला कलेक्ट्रेट के बाहर एकत्र हुए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह शक्तावत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिस बर्बर तरीके से पर्यटकों पर आतंकी हमला किया गया है, उससे पूरे देश में गुस्सा है। उन्होंने मांग की कि गुनाहगारों को उनके जघन्य अपराधों की कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने आतंकवाद विरोधी नारे लगाए और पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यक्ष शक्तावत ने आगे कहा कि पहलगाम में आतंकियों ने जो कायराना हरकत की है, उसके विरोध में उदयपुर बार एसोसिएशन ने कार्य बहिष्कार किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इस हमले के आरोपियों को उनके गुनाहों की सजा नहीं मिल जाती, तब तक वकील काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराते रहेंगे।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में राष्ट्रपति से यह पुरजोर मांग की गई है कि जब तक पहलगाम आतंकी हमले के सभी आतंकवादियों को पकड़कर न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता, तब तक जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। वकीलों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए आवश्यक है।
गौरतलब है कि पहलगाम में हुए इस नृशंस आतंकी हमले के विरोध में पूरे देश में आक्रोश और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। मंगलवार को अनंतनाग जिले के पहलगाम में आतंकवादियों ने एक प्रमुख पर्यटन स्थल पर पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें दो विदेशी नागरिकों सहित 26 पर्यटकों की दुखद मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और सरकार पर आतंकवाद के खिलाफ और भी कठोर कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।
