रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : जिले के विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों और संरक्षण को लेकर एक व्यापक जागरूकता अभियान का आगाज होने जा रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की परिकल्पना पर आधारित “सुरक्षित बचपन अभियान” के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल द्वारा स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाल यौन शोषण, उत्पीड़न और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। यह अभियान न्यायपालिका, जिला बाल संरक्षण इकाई, शिक्षा विभाग और विभिन्न प्रशासनिक एवं सामाजिक संस्थाओं के आपसी समन्वय से चलाया जाएगा।
प्रथम चरण में 26 से 31 अक्टूबर तक स्कूलों में होंगे जागरूकता कार्यक्रम
Supaul इस विशेष अभियान के पहले चरण की शुरुआत 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक की जाएगी। इस दौरान सुपौल जिले के विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों को उनके मौलिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रमों में मुख्य रूप से लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, यानी पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श (Good Touch & Bad Touch) की पहचान, ऑनलाइन सुरक्षा तथा साइबर खतरों से बचने के उपायों पर विस्तार से चर्चा होगी। बच्चों को यह भी सिखाया जाएगा कि किसी भी प्रकार की संकट या उत्पीड़न की स्थिति में वे बिना किसी डर के अपने शिक्षक, अभिभावक या संबंधित विधिक प्राधिकरण से संपर्क करके मदद कैसे मांग सकते हैं।
शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण और सतत बाल संरक्षण व्यवस्था
Supaul अभियान के दूसरे और महत्वपूर्ण चरण के तहत विद्यालयों द्वारा नामित शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल स्तर पर बाल अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम केवल एक बार न होकर नियमित रूप से संचालित होते रहें। प्रशिक्षित शिक्षक अपने विद्यालय के अन्य साथियों को भी इसकी जानकारी देंगे, जिससे शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा का एक मजबूत, प्रभावी और निरंतर चलने वाला तंत्र विकसित किया जा सके। इससे शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद मजबूत होगा और छात्र अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकेंगे।
सुरक्षित बचपन की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी और समन्वय
Supaul इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, पुलिस विभाग और गैर-सरकारी संगठनों (जैसे SSEVS) के बीच तालमेल स्थापित किया गया है। अभियान का अंतिम लक्ष्य समुदाय, अभिभावकों और शिक्षकों को साथ जोड़कर बच्चों की सुरक्षा को एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है। प्राधिकार का प्रयास है कि जिले का हर बच्चा भयमुक्त माहौल में शिक्षा ग्रहण करे और किसी भी अप्रिय स्थिति में समय रहते उचित कानूनी व सामाजिक सहायता प्राप्त करने में सक्षम बन सके।
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