रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Gwalior : देशभर में विजयादशमी का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। कुल्लू और मैसूर की तर्ज पर मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर में भी आज पारंपरिक शाही शानो-शौकत के साथ दशहरा मनाने की अनोखी परंपरा देखने को मिली। करीब ढाई सौ साल पहले सिंधिया राजवंश द्वारा शुरू की गई इस ऐतिहासिक परंपरा को आज भी सिंधिया परिवार के वंशज और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पूरी भव्यता और निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
शाही पोशाक में पैलेस से निकले ज्योतिरादित्य और महाआर्यमन सिंधिया
Gwalior विजयादशमी के शुभ अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पुत्र महाआर्यमन सिंधिया के साथ पारंपरिक शाही पोशाक धारण कर जयविलास पैलेस से रवाना हुए। वहां से वे महाराज बाड़ा स्थित ऐतिहासिक देवघर पहुंचे, जहां सिंधिया राजपरिवार के वरिष्ठ पुरोहितों की उपस्थिति में रियासतकालीन परंपरा के अनुसार विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। दोनों नेताओं ने लगभग आधे घंटे तक पूरे विधि-विधान से पूजा की और उसके बाद भव्य महाआरती का आयोजन किया गया।
देवघर में हुआ रियासतकालीन शस्त्रों का पारंपरिक पूजन
Gwalior पूजा-अर्चना के दौरान सिंधिया राजपरिवार के वर्षों पुराने ऐतिहासिक शस्त्रों का पूजन किया गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और महाआर्यमन सिंधिया ने बारी-बारी से शस्त्रों पर तिलक लगाकर व पुष्प अर्पित कर पारंपरिक शस्त्र पूजन की रस्म पूरी की। यह अनूठी परंपरा सिंधिया वंश के वैभवशाली इतिहास और उनकी सैन्य संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
रियासतकालीन दरबार का आयोजन और देशवासियों को विजयादशमी का संदेश
Gwalior शस्त्र पूजन के उपरांत प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए एक भव्य राज दरबार सजाया गया। इस पारंपरिक दरबार में सिंधिया रियासत से जुड़े सरदारों और गणमान्य नागरिकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और महाआर्यमन सिंधिया का शाही अंदाज में अभिवादन किया। इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सभी देशवासियों को विजयादशमी की बधाई दी और कहा कि यह पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की शाश्वत विजय का प्रतीक है।

