By: Ravindra Singh
Maa Katyayani : शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस और अन्याय का अंत करने वाली देवी हैं। भक्त श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करके जीवन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने के कारण महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। मान्यता है कि विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए भी मां के इस स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पौराणिक कथा, स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और प्रिय भोग के बारे में।
मां कात्यायनी की पौराणिक कथा क्या है?
Maa Katyayani पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नामक असुर के अत्याचारों से देवता और पृथ्वीवासी परेशान थे। उसे पराजित करने के लिए देवताओं ने अपनी शक्तियों का तेज एकत्र किया, जिससे देवी के दिव्य स्वरूप का प्राकट्य हुआ।
कहा जाता है कि महर्षि कात्यायन ने देवी भगवती की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। महर्षि ने देवी को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने की इच्छा जताई। देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और बाद में महर्षि कात्यायन के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा।
इसके बाद मां कात्यायनी ने महिषासुर के साथ युद्ध किया और उसका वध करके देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। इस विजय के बाद देवी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाने लगा। उनकी कथा बुराई पर अच्छाई की जीत और अधर्म के विरुद्ध शक्ति के उपयोग का संदेश देती है।
धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने वाली देवी भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि बृज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से मां कात्यायनी की आराधना की थी।
कैसा है मां कात्यायनी का स्वरूप?
Maa Katyayani मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य बताया गया है। उनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकदार माना जाता है और वे सिंह पर सवार रहती हैं। उनकी चार भुजाएं हैं।
- दाहिने हाथ की ऊपरी भुजा अभय मुद्रा में रहती है, जो भक्तों को निर्भयता का संदेश देती है।
- दाहिने हाथ की निचली भुजा वर मुद्रा में होती है, जो कृपा और मनोकामनाओं की पूर्ति का प्रतीक मानी जाती है।
- बाएं हाथ की ऊपरी भुजा में तलवार सुशोभित होती है, जो शक्ति और अधर्म के विनाश का प्रतीक है।
- बाएं हाथ की निचली भुजा में कमल का पुष्प होता है, जो पवित्रता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
मां का यह स्वरूप भक्तों को साहस, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
नवरात्रि के छठे दिन कैसे करें मां कात्यायनी की पूजा?
Maa Katyayani नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। श्रद्धा और विधि के अनुसार निम्न तरीके से पूजा कर सकते हैं।
- संकल्प लें: मां कात्यायनी का ध्यान करके सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करें।
- दीपक जलाएं: पूजा स्थल पर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- फूल और अक्षत चढ़ाएं: मां को पुष्प, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
- मंत्र का जाप करें: मां कात्यायनी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- भोग लगाएं: मां को अपनी श्रद्धा के अनुसार शहद, खीर या अन्य सात्विक नैवेद्य अर्पित करें।
- आरती करें: पूजा के अंत में मां की आरती करें और सुख-समृद्धि, साहस तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।
पूजा में पीले और लाल फूल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। वस्त्रों के रंग और अन्य पूजन सामग्री का चयन अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
मां कात्यायनी का मंत्र
Maa Katyayani नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है:
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
मंत्र का जाप शांत मन और श्रद्धा के साथ करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां का स्मरण करने से मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।
मां कात्यायनी को कौन-सा भोग लगाएं?
Maa Katyayani मां कात्यायनी की पूजा में शहद और खीर का भोग अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पीले या लाल पुष्पों के साथ सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी की पूजा को साहस, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ये आस्थाओं पर आधारित मान्यताएं हैं।
मां कात्यायनी की पूजा का क्या है महत्व?
Maa Katyayani नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना शक्ति, निर्भयता और बुराइयों पर विजय के प्रतीक के रूप में की जाती है। भक्त उनसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
नवरात्रि का यह दिन श्रद्धा, संयम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। मां कात्यायनी की पूजा करते समय स्वच्छता, सात्विकता और सच्ची भावना का विशेष ध्यान रखें।

