Flood Relief Crisis in KatiharFlood Relief Crisis in Katihar
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Flood Relief Crisis in Katihar;बिहार के कटिहार जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार चिंता बढ़ा रही है। कुर्सेला प्रखंड के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुसने से लोगों के सामने भोजन और जरूरी सामान का संकट पैदा हो गया है। बताया जा रहा है कि करीब 200 परिवार बाढ़ प्रभावित होकर बेहद कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं।

बाढ़ के कारण कई परिवारों के घरों में रखा अनाज और अन्य खाद्य सामग्री खराब हो गई है। ऐसे में प्रभावित लोगों को राहत सामग्री का इंतजार है। इसी बीच कुर्सेला रेलवे ढाला के पास राहत वितरण के दौरान ऐसी स्थिति देखने को मिली, जिसमें राशन बांटने से पहले ही लोगों की भीड़ गाड़ी के पास पहुंच गई।

गाड़ी से ही निकालने लगे राशन के पैकेट

Flood Relief Crisis in Katihar;स्थानीय मुखिया और JDU महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष प्रीतम कुशवाहा बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सूखा राशन लेकर वहां पहुंचीं। जैसे ही उनकी गाड़ी मौके पर रुकी, बड़ी संख्या में लोग उसके आसपास जमा हो गए।

गाड़ी की डिक्की खुलते ही कुछ लोगों ने राशन के पैकेट निकालना शुरू कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बढ़ गई और राहत सामग्री लोगों के हाथों में पहुंचने लगी। इस दौरान व्यवस्थित तरीके से वितरण शुरू होने से पहले ही वाहन लगभग खाली हो गया।

कई परिवार पॉलिथीन के नीचे रहने को मजबूर

Flood Relief Crisis in Katiharबताया गया कि रेलवे ढाला के आसपास करीब 200 बाढ़ प्रभावित परिवार पॉलिथीन के सहारे रहने को मजबूर हैं। लगातार जलभराव और खाद्य सामग्री की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

राहत वितरण के दौरान हुई इस अफरा-तफरी ने प्रभावित परिवारों की गंभीर स्थिति को भी सामने ला दिया। राशन के लिए लोगों की बेचैनी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके सामने भोजन की कितनी बड़ी समस्या खड़ी है।

JDU नेत्री ने भी जताई चिंता

Flood Relief Crisis in Katihar;मौके पर मौजूद JDU नेत्री प्रीतम कुशवाहा ने लोगों की स्थिति को बेहद गंभीर बताया। उनका कहना था कि जिस तरह बाढ़ पीड़ित राहत सामग्री के लिए अचानक गाड़ी की ओर टूट पड़े, उससे उनकी जरूरत और परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में इस तरह की घटनाएं राहत सामग्री के बेहतर प्रबंधन और समय पर वितरण की जरूरत को भी रेखांकित करती हैं। प्रभावित परिवारों तक पर्याप्त भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं व्यवस्थित तरीके से पहुंचाना फिलहाल बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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