Allahabad High Court;;इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में 18 वर्षीय युवती को अपनी पसंद से पति के साथ रहने की अनुमति दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपने जीवनसाथी का चुनाव करने और अपनी इच्छा के अनुसार रहने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। केवल माता-पिता की असहमति या चिंता के आधार पर इस अधिकार को सीमित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने संबंधित अधिकारियों को युवती और उसके पति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
पति की ओर से लगाए गए थे गंभीर आरोप
Allahabad High Court;e;अदालत में युवती के पति की ओर से पेश वकील ने बताया कि दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह किया है। उनका आरोप था कि शादी के बाद युवती के पिता और रिश्तेदारों ने उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने पास रखा।
युवती के पति के पक्ष ने यह भी बताया कि मामले में FIR दर्ज नहीं होने के बाद युवती ने 20 जुलाई 2026 को बदायूं की सक्षम अदालत में शिकायत दाखिल की थी। इसमें उसने अपने पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पिता ने शादी की बात से किया इनकार
Allahabad High Court;;दूसरी तरफ युवती के पिता ने अदालत में विवाह के दावे को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि उनकी बेटी अपनी इच्छा से उनके साथ रह रही है और उसे किसी तरह से बंधक बनाकर नहीं रखा गया है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पिता ने युवती के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने उसे बरामद कर उसके पिता के सुपुर्द कर दिया था।
कोर्ट ने युवती को खुद पेश होने का दिया था निर्देश
Allahabad High Court;;मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पहले उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की। अदालत ने पाया कि युवती वयस्क हो चुकी है। इसके बावजूद यह स्पष्ट करने के लिए कि वह अपने माता-पिता के साथ स्वेच्छा से रह रही है या उसकी इच्छा के खिलाफ उसे रोका गया है, कोर्ट ने उसे व्यक्तिगत रूप से पेश करने का आदेश दिया।
7 सितंबर को युवती अदालत के सामने पेश हुई। जस्टिस संदीप जैन ने उससे उसकी उम्र, विवाह और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर बातचीत की।
युवती ने पति के साथ रहने की इच्छा जताई
Allahabad High Court;;अदालत में युवती ने बताया कि उसकी जन्मतिथि 8 जून 2008 है और वह 18 वर्ष की हो चुकी है। उसने कहा कि उसने अपनी इच्छा से 18 जुलाई 2026 को मोहित से विवाह किया था।
युवती ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि वह अपने पति के साथ पत्नी के रूप में रहना चाहती है। उसके पति ने भी विवाह की पुष्टि करते हुए उसके साथ रहने की इच्छा जताई।
सुनवाई के दौरान युवती के पिता ने भी यह स्वीकार किया कि उनकी बेटी बालिग है।
संवैधानिक अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणी
Allahabad High Court;e;हाईकोर्ट ने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, माता-पिता की चिंताएं अपनी जगह हो सकती हैं, लेकिन वे वयस्क व्यक्ति की संवैधानिक स्वायत्तता से ऊपर नहीं हो सकतीं।
कोर्ट ने माना कि जीवनसाथी का चयन व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में राज्य की संस्थाओं को व्यक्ति की स्वायत्तता और स्वतंत्र निर्णय का सम्मान करना चाहिए।
अदालत के निर्देश के बाद युवती को अपनी इच्छा के अनुसार पति के साथ रहने की अनुमति मिल गई है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।

