रिपोर्टर: प्रेम श्रीवास्तव
Jamshedpur : एक्सएलआरआई (XLRI) – ज़ेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर में दो दिवसीय ‘जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (JMS) पब्लिशिंग वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चले इस कार्यक्रम में शोधार्थियों, प्रोफेसरों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उच्च स्तरीय शोध पत्रिकाओं में शोध-पत्र प्रकाशित करने की कला और शैक्षणिक करियर को नई दिशा देने पर मंथन करना था।

अंतरराष्ट्रीय संपादकों ने दिए शोध प्रकाशन के सूत्र
Jamshedpur कार्यशाला के दौरान विश्व प्रसिद्ध जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ की संपादकीय टीम ने शोधार्थियों को व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया:
- प्रकाशन प्रक्रिया: मुख्य संपादक प्रो. जोहान फोर्टवेंजेल ने बताया कि संपादक हमेशा प्रभावशाली और मौलिक शोध की तलाश में रहते हैं। उनका लक्ष्य शोधकर्ताओं की पांडुलिपि को उसके सर्वोत्तम रूप में प्रस्तुत करने में मदद करना है।
- सैद्धांतिक योगदान (Theoretical Contribution): सह-संपादक प्रो. क्लाउडिया गैबियोनेटा ने स्पष्ट किया कि एक बेहतर शोध पत्र वही है जो केवल डेटा तक सीमित न रहकर मौजूदा सिद्धांतों को चुनौती दे या उसमें नया दृष्टिकोण जोड़े।
- समीक्षा और संशोधन (Revise & Resubmit): सह-संपादक प्रो. शमीन प्रशांतम ने समीक्षा के बाद प्राप्त सुझावों को सकारात्मक रूप से लेने और उनके आधार पर शोध में सुधार करने के महत्व पर बल दिया।
पैनल चर्चा: करियर में शोध और एआई (AI) का प्रभाव
Jamshedpur दूसरे दिन प्रो. अब्दुल कादिर के संचालन में “करियर और प्रकाशन की भूमिका” पर एक विशेष पैनल चर्चा हुई। इसमें प्रो. जोहान फोर्टवेंजेल, प्रो. क्लाउडिया गैबियोनेटा, प्रो. शमीन प्रशांतम, प्रो. मुनीश कुमार ठाकुर (डीन, एक्सएलआरआई दिल्ली-एनसीआर), प्रो. संजीव वार्ष्णेय और प्रो. टीना के. स्टीफन ने हिस्सा लिया।

इसी क्रम में हार्वर्ड बिज़नेस इम्पैक्ट के अमित सिद्धार्थ ने “एआई-सक्षम कक्षा में मानवीय दक्षता” विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते दौर में भी मानवीय सोच, संवाद और सीखने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
डॉक्टोरल यात्रा और शोध पारिस्थितिकी तंत्र
Jamshedpur कार्यक्रम के अंतिम सत्रों में अकादमिक लेखन, शोध प्रस्तुति और मानसिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया गया। “पीएचडी का अनकहा पाठ्यक्रम” नामक शोधार्थियों के पैनल में औपचारिक पाठ्यक्रम से इतर मिलने वाले अनुभवों को साझा किया गया। इस पूरी कार्यशाला ने एक्सएलआरआई की शोध परंपरा को मजबूत करने और शोधार्थियों को वैश्विक विशेषज्ञों के साथ जुड़ने का एक मूल्यवान मंच प्रदान किया।
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