Ravi Pradosh Vrat Katha : आज 12 जुलाई 2026 को रवि प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। रविवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, शिव पूजन करने और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करने से पितृ दोष से राहत मिलती है, सूर्य से जुड़े दोष शांत होते हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस वर्ष रवि प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ समय शाम 7:22 बजे से रात 9:24 बजे तक रहेगा। आइए जानते हैं रवि प्रदोष व्रत की प्रचलित पौराणिक कथा।
Ravi Pradosh Vrat Katha रवि प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से शिव पूजा, व्रत और कथा श्रवण करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही मान-सम्मान, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होने की मान्यता है।
Ravi Pradosh Vrat Katha रवि प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
प्राचीन समय में एक गांव में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण अपने परिवार के साथ रहता था। उसकी पत्नी बड़ी श्रद्धा और नियमपूर्वक प्रत्येक प्रदोष व्रत का पालन करती थी। उनका एक पुत्र था, जिसे एक दिन गंगा स्नान के लिए भेजा गया।
रास्ते में कुछ चोरों ने उस बालक को रोक लिया और उससे उसके पिता के धन के बारे में पूछने लगे। बालक ने विनम्रता से बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब है और उनके पास कोई धन-संपत्ति नहीं है। जब चोरों ने उसकी पोटली के बारे में पूछा तो उसने कहा कि उसमें केवल उसकी मां द्वारा दी गई रोटियां हैं। उसकी सादगी देखकर चोरों ने उसे बिना नुकसान पहुंचाए जाने दिया।
Ravi Pradosh Vrat Katha निर्दोष बालक पर लगा चोरी का आरोप
आगे बढ़ते हुए बालक एक नगर के बाहर स्थित बरगद के पेड़ के नीचे विश्राम करने लगा। यात्रा की थकान के कारण उसे वहीं नींद आ गई। उसी समय नगर के सैनिक चोरों की तलाश करते हुए वहां पहुंचे। उन्होंने सोए हुए बालक को ही चोर समझ लिया और पकड़कर राजा के सामने प्रस्तुत कर दिया।
बिना पूरी जांच किए राजा ने उसे कारागार में बंद करने का आदेश दे दिया। उधर जब पुत्र घर नहीं लौटा तो उसके माता-पिता अत्यंत चिंतित हो गए।
Ravi Pradosh Vrat Katha भगवान शिव ने राजा को दिया संकेत
अगले दिन प्रदोष व्रत था। ब्राह्मणी ने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा और भगवान शिव से अपने पुत्र की सुरक्षा और शीघ्र वापसी की प्रार्थना की।
उसी रात भगवान शिव राजा के स्वप्न में प्रकट हुए और कहा कि जिस बालक को बंदी बनाया गया है वह पूरी तरह निर्दोष है। यदि उसे तुरंत मुक्त नहीं किया गया तो राज्य पर संकट आ सकता है।
Ravi Pradosh Vrat Katha शिव कृपा से मिला न्याय
सुबह होते ही राजा ने बालक को तुरंत रिहा कर दिया। बालक ने अपनी पूरी आपबीती राजा को सुनाई। सत्य जानने के बाद राजा ने उसके माता-पिता को राजदरबार में बुलाया, उनका सम्मान किया और उनकी निर्धनता दूर करने के लिए पांच गांव दान में दिए।
इसके बाद ब्राह्मण परिवार सुख और सम्मान के साथ जीवन बिताने लगा। तभी से यह मान्यता प्रचलित है कि जो श्रद्धालु रवि प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना और कथा का पाठ करता है, उसके जीवन की कठिनाइयां धीरे-धीरे समाप्त होती हैं और उसे सुख, समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
Ravi Pradosh Vrat Katha रवि प्रदोष व्रत से जुड़ी मान्यता
- भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- पितृ दोष और सूर्य से जुड़े दोषों में राहत मिलने की मान्यता है।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
- स्वास्थ्य, यश और सम्मान में वृद्धि होती है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित है। इसकी वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

