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Bhopal : मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और वीर भारत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत भोपाल के भारत भवन में इन दिनों सात दिवसीय ‘सदानीरा समागम’ की धूम है। महोत्सव के छठवें दिन कला और चेतना का एक अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से जल और मानवीय संवेदनाओं के गहरे रिश्तों को मंच पर जीवंत कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में बुंदेली लोकगीत गायिका अनामिका पांडे (छतरपुर) और उनके साथियों ने लोक संस्कृति के रंग बिखेरे, जिसके बाद मुख्य मंच पर विचारोत्तेजक प्रस्तुतियां दी गईं।

Bhopal क्रिटिकल पॉइंट: मानवीय इच्छाओं और चेतना के बदलाव का विज्ञान

शाम का मुख्य आकर्षण दक्षिण कोरिया के सुप्रसिद्ध समूह ‘मुट डांस कंपनी’ द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाट्य ‘क्रिटिकल पॉइंट’ रहा। विज्ञान के सिद्धांत पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। जिस तरह विज्ञान में ‘क्रिटिकल पॉइंट’ वह अवस्था है जहाँ कोई पदार्थ अपना रूप बदल लेता है, ठीक उसी तरह कलाकारों ने दिखाया कि मानव जीवन में भी एक ऐसा अदृश्य मोड़ आता है जहाँ मनुष्य के विचार, भावनाएं और आकांक्षाएं बदल जाती हैं। नृत्य, बेहतरीन प्रकाश संयोजन और संगीत के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि निर्मल इच्छाएं जब अत्यधिक लालसा और अहंकार में बदलती हैं, तो वह मनुष्य के पतन का कारण बन सकती हैं।

Bhopal जल दर्पण: ओडिसी शैली में सृष्टि के मूल तत्व का अन्वेषण

इसी मंच पर भुवनेश्वर के प्रसिद्ध ओडिसी गुरु बिचित्रानंद स्वैन के निर्देशन में तैयार नृत्य-नाटिका ‘जल दर्पण’ का मंचन हुआ। इस प्रस्तुति में जल को किसी वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि मुख्य पात्र के रूप में दिखाया गया। पांच अलग-अलग खंडों में विभाजित इस नाट्य ने यह संदेश दिया कि जल जहाँ जीवन का सृजन करता है, वहीं उसमें सब कुछ विलीन करने की विनाशकारी शक्ति भी है। इस उत्कृष्ट रचना की पटकथा केदार मिश्रा ने लिखी थी, जबकि संगीत गुरु रामाहरी दास और डॉ. हिमांशु शेखर स्वैन द्वारा तैयार किया गया था।

Bhopal कलाकारों का सम्मान और समागम का उद्देश्य

समारोह के अंत में वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव ने सभी आगंतुक और स्थानीय कलाकारों का विशेष तौर पर तैयार स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर अभिनंदन किया। इस सात दिवसीय समागम का मुख्य उद्देश्य कलात्मक माध्यमों से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और समाज को प्रकृति के सबसे मूल्यवान तत्व ‘जल’ के महत्व से रूबरू कराना है।

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