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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Kota : न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद राज्य सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने स्वयं कोटा पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने आईसीयू और नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनके उपचार की समीक्षा की और स्पष्ट चेतावनी दी कि इस पूरे मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

Kota आईसीयू में मरीजों का हालचाल और उपचार की निगरानी

प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के आईसीयू में भर्ती प्रसूताओं के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट की देखरेख में चल रहे इलाज की जानकारी ली। डॉक्टरों ने बताया कि प्रसूता रागिनी मीणा सहित अन्य मरीजों की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। सचिव ने निर्देश दिए कि जयपुर और कोटा के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे मरीजों की मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे ताकि किसी भी मरीज की स्थिति दोबारा न बिगड़े।

Kota संक्रमण रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल और स्टरलाइजेशन पर जोर

अस्पताल के निरीक्षण के बाद आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में गायत्री राठौड़ ने संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) को लेकर कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन थिएटर (OT), आईसीयू और इमरजेंसी इकाइयों का नियमित स्टरलाइजेशन प्रोटोकॉल के अनुसार अनिवार्य रूप से किया जाए। साथ ही, चिकित्सा उपकरणों और मशीनों की स्वच्छता में किसी भी तरह की कोताही न बरतने की हिदायत दी। उन्होंने जोर दिया कि अस्पतालों में ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल की सख्ती से पालना ही ऐसी घटनाओं को रोकने का एकमात्र उपाय है।

Kota लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई और वरिष्ठ डॉक्टरों की जवाबदेही तय

प्रमुख शासन सचिव ने साफ किया कि प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन जांच जारी है। उन्होंने आदेश दिया कि संवेदनशील वार्डों और ओटी में केवल जूनियर स्टाफ के भरोसे काम न छोड़ा जाए, बल्कि वहाँ वरिष्ठ डॉक्टरों की मौजूदगी अनिवार्य हो। भविष्य में यदि ऐसी कोई घटना दोबारा होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संस्थान प्रभारी और यूनिट हेड को जिम्मेदार मानते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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