Report by: Santosh Saravagi
Dabra : ग्वालियर जिले की महत्वपूर्ण ग्रामीण विधानसभा डबरा, जो कहने को तो हाई-प्रोफाइल नेताओं का क्षेत्र रही है, लेकिन यहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद ‘आईसीयू’ में नजर आ रही है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन ग्वालियर जिले के डबरा सिविल अस्पताल से जो खबर सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली है। यहाँ 5 लाख की आबादी वाले क्षेत्र के मुख्य सरकारी अस्पताल में प्रसूति (डिलीवरी) जैसे संवेदनशील मामलों के लिए किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) के बजाय एक नाक, कान और गला (ENT) विशेषज्ञ को नियुक्त किया गया है।


Dabra विशेषज्ञता दरकिनार: नाक-कान की डॉक्टर बनीं ‘गाइनकोलॉजिस्ट’
डबरा सिविल अस्पताल में पिछले 15 वर्षों से पदस्थ डॉ. आशा सिंह मूल रूप से ईएनटी विशेषज्ञ हैं। चिकित्सा नियमों के अनुसार, उनका मुख्य कार्य नाक, कान और गले से संबंधित बीमारियों का उपचार करना है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि डॉ. आशा सिंह की रुचि अपने मूल विषय के बजाय महिलाओं के प्रसव कराने में अधिक है। एक गैर-विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा सर्जरी या जटिल प्रसव कराना मरीजों की जान को सीधे तौर पर जोखिम में डालने जैसा है।

Dabra सस्पेंशन के बाद भी उसी पद पर जमी हैं डॉक्टर
डॉ. आशा सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। जानकारी के अनुसार, वे अपने कार्यकाल के दौरान कई बार निलंबित (Suspend) भी हो चुकी हैं। प्रशासनिक नियमों के मुताबिक, यदि किसी डॉक्टर को गंभीर लापरवाही के कारण निलंबित किया जाता है, तो उसे पुनः उसी अस्पताल में नियुक्त करना नियम विरुद्ध है। इसके बावजूद, वे डबरा में ही जमी हुई हैं। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का उन्हें वरदहस्त प्राप्त है, जिसके चलते उन पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होती।
Dabra 5 लाख की आबादी और एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं
डबरा क्षेत्र की जनसंख्या लगभग 5 लाख है। इतनी बड़ी आबादी के लिए संचालित सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के पास एक भी योग्य गाइनकोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर ईएनटी डॉक्टर से प्रसूति का कार्य लेना विभाग की लाचारी और लापरवाही को उजागर करता है। यदि किसी प्रसव के दौरान स्थिति बिगड़ती है या जच्चा-बच्चा की जान को खतरा होता है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
Dabra जिम्मेदार अधिकारियों का ‘बचकाना’ तर्क
जब इस गंभीर लापरवाही के संबंध में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. आलोक त्यागी से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने कहा कि “यदि ईएनटी डॉक्टर गाइनकोलॉजी का काम कर रही हैं, तो इसमें क्या परेशानी है, वह ऐसा कर सकती हैं।” अधिकारियों का यह रुख दर्शाता है कि विभाग पिछली गलतियों से सीख लेने के बजाय उन्हें दोहराने पर आमादा है। पूर्व में भी ग्वालियर के विभिन्न अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही के कारण कई महिलाएं अपनी जान गंवा चुकी हैं।
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