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Gwalior : जल संकट की भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए केआरजी कॉलेज परिसर में स्थित ऐतिहासिक बावड़ी के संरक्षण हेतु दो दिवसीय विशेष अभियान का आगाज़ किया गया है। 28 और 29 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं और पर्यावरण प्रेमियों ने श्रमदान कर जल स्रोतों को बचाने का संदेश दिया।

संयुक्त तत्वावधान में अनूठी पहल

Gwalior यह अभियान महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और श्री साई एंटरप्राइजेज (दीप नीर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) के संयुक्त प्रयासों से संचालित किया जा रहा है। इस मिशन की कमान प्रसिद्ध जल संरक्षणवादी और “वाटर वुमन” के नाम से विख्यात सावित्री ने संभाली है। उन्होंने छात्राओं को बताया कि किस प्रकार प्राचीन बावड़ियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

स्वच्छता और पुनरुद्धार अभियान

Gwalior अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक बावड़ी के आसपास जमा कचरे, झाड़ियों और मलबे को साफ करने के लिए विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया।

  • श्रमदान: NSS की स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक बावड़ी के तलहटी और ऊपरी हिस्से की सफाई की।
  • तकनीकी मार्गदर्शन: दीप नीर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग संस्था द्वारा बावड़ी में वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting) को और बेहतर बनाने के तकनीकी पहलुओं पर जानकारी साझा की गई।
  • उद्देश्य: इस सफाई का मुख्य लक्ष्य जलभराव क्षमता को बढ़ाना और दूषित हो रहे जल को स्वच्छ बनाना है।

जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Gwalior इस दो दिवसीय कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को जल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।

  • जन-जागरूकता: महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि जब छात्र स्वयं इन ऐतिहासिक ढांचों के संरक्षण में उतरते हैं, तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है।
  • विरासत का संरक्षण: ऐतिहासिक बावड़ी को सहेजकर कॉलेज परिसर न केवल अपनी सुंदरता बढ़ा रहा है, बल्कि भूजल स्तर (Groundwater level) को सुधारने में भी योगदान दे रहा है।

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