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By: Yogendra Singh

Rohtas : जिले के सासाराम में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत तीन दिवसीय प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेले की शुरुआत हुई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार के अधीन एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, पटना द्वारा इस आयोजन का संचालन किया जा रहा है। जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने शुक्रवार को दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह मेला 27 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक सासाराम के रेलवे स्टेडियम परिसर में आयोजित किया जा रहा है।

पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा सीधा बाजार

Rohtas उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, सुनार, नाई, राजमिस्त्री, मोची सहित विभिन्न परंपरागत व्यवसायों से जुड़े कारीगर अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रहे हैं।

इस मेले के माध्यम से कारीगरों को ग्राहकों और व्यापारियों से सीधे जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि की संभावना है, बल्कि उनके उत्पादों को व्यापक पहचान भी मिल सकेगी। प्रदर्शनी में स्थानीय हस्तशिल्प और कारीगरी की जीवंत झलक देखने को मिल रही है, जो क्षेत्रीय कला को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी।

वित्तीय सहयोग और उद्यमिता मार्गदर्शन

Rohtas मेले में केवल उत्पादों की बिक्री ही नहीं, बल्कि कारीगरों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, उद्यमिता संबंधी परामर्श और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है। वित्तीय सहायता, ऋण सुविधा और प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि कारीगर आत्मनिर्भर बन सकें और अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें।

कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक नागरिक इस पहल का लाभ उठा सकें और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर सकें।

अधिक से अधिक भागीदारी की अपील

Rohtas कार्यक्रम के समन्वयक एवं एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, पटना के सहायक निदेशक घमण्डी लाल मीणा ने बताया कि इस मेले का उद्देश्य स्थानीय शिल्पकारों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने जिले के नागरिकों, उद्यमियों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में मेले में पहुंचकर कारीगरों का उत्साहवर्धन करें।

यह आयोजन न केवल पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगा।

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