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शीर्षासन कर जताया विरोध: “मैं उग्रवादी नहीं, यजमान हूँ”

By: Yogendra Singh

Bhopal : मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के 10वें दिन शिवपुरी से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने सदन परिसर में शीर्षासन कर विरोध जताया। मामला 15 फरवरी को आयोजित शिवरात्रि के धार्मिक आयोजन में हुई हर्ष फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें जंडेल के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल यज्ञ और भगवान की पालकी के दौरान उत्साह में एक ‘चढ़ीमार’ फायर किया था और किसी प्रकार का हथियार उनके पास नहीं था। जंडेल ने कहा, “मैं किसी उग्रवादी गतिविधि में शामिल नहीं था, मैं तो यज्ञ का यजमान था। सरकार मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगा रही है।”

जंडेल ने विधानसभा भवन के बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने और पेड़ के नीचे लेटकर विरोध जारी रखा। उनकी इस अनूठी कार्रवाई ने सदन और बाहर मीडिया का ध्यान खींचा।

कांग्रेस का वॉकआउट और आंदोलन की चेतावनी

Bhopal शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय और सचेतक सोहन वाल्मीकि ने FIR के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। जब विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को संबंधित विभाग को भेजने की बात कही, तो असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। बाबू जंडेल ने चेतावनी दी कि यदि उनके खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली गई, तो वे गांधी आश्रम में धरना देंगे और सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

इस वॉकआउट के दौरान सदन का वातावरण तनावपूर्ण हो गया और विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाए कि राज्य में राजनीतिक प्रतिशोध का दुष्प्रयोग किया जा रहा है।

किसानों और कर्मचारियों के मुद्दों पर ध्यानाकर्षण

Bhopal विरोध और हंगामे के बीच सदन में जनहित के मुद्दों पर भी ध्यानाकर्षण प्रस्तुत किया गया।

  • किसानों के मुद्दे: डिंडोरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने धान खरीदी पोर्टल के तकनीकी समस्याओं की जानकारी दी, जबकि विधायक कैलाश कुशवाहा ने खाद संकट और बढ़ती कीमतों की समस्या उठाई।
  • कर्मचारी और अतिथि विद्वान: नर्मदापुरम विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने अतिथि विद्वानों के बकाया मानदेय का मुद्दा उठाया। इसके अलावा, दिनेश गुर्जर ने डेटा एंट्री ऑपरेटर्स के अटैचमेंट की समस्या सामने रखी।
  • सड़क सुरक्षा और राजस्व: नागदा-खाचरोद विधायक ने उज्जैन-जावरा रोड पर हो रही दुर्घटनाओं की चिंता जताई और अन्य विधायकों ने राजस्व अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण में आ रही त्रुटियों पर सरकार का ध्यान खींचा।

इस तरह, बाबू जंडेल के अनोखे विरोध और विपक्षी विधायकों की सक्रियता ने विधानसभा में हंगामे के बीच जनहित के मुद्दों को भी प्रमुखता दिलाई।

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