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पश्चिम बंगाल मामले की सुनवाई में शीर्ष अदालत का कड़ा रुख

By: Ishu Kumar

Special Intensive Revision : विशेष जांच रिपोर्ट (SIR) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है कि इस संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह साफ कर दिया कि पारदर्शिता और निष्पक्षता से समझौता नहीं होगा। चुनाव आयोग की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बाद कोर्ट ने एसआईआर डेटा को अंतिम रूप देने की समय-सीमा एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है।

एसआईआर पर सर्वोच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि एसआईआर जैसी प्रक्रिया लोकतंत्र की नींव से जुड़ी है और इसमें सभी राज्यों का सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने दो टूक कहा कि जहां सुधार की जरूरत होगी, वहां न्यायालय हस्तक्षेप करेगा, लेकिन किसी भी स्तर पर बाधा या दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रक्रिया के दौरान कोई प्रशासनिक या राजनीतिक अड़चन सामने आती है, तो न्यायालय आवश्यक निर्देश जारी करने से पीछे नहीं हटेगा।

डीजीपी से व्यक्तिगत जवाब, समय-सीमा में राहत

सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। यह कदम चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद उठाया गया, जिनमें एसआईआर ड्यूटी में तैनात अधिकारियों को धमकाने और हिंसा की घटनाओं का उल्लेख किया गया था।
इसके साथ ही अदालत ने दस्तावेजों के सत्यापन और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की अंतिम तिथि 14 फरवरी से बढ़ाकर 21 फरवरी कर दी है। कोर्ट ने माना कि प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सीमित समय-सीमा में यथार्थवादी राहत देना जरूरी है।

Special Intensive Revision अधिकारियों की नियुक्ति पर निगरानी

पिछली सुनवाई में निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (एईआरओ) की नियुक्ति पर भी सवाल उठे थे। राज्य सरकार ने बताया कि 292 ईआरओ की सूची चुनाव आयोग को भेज दी गई है और बड़ी संख्या में सहायक अधिकारी तैनात किए गए हैं।
इस पर चुनाव आयोग ने प्रशिक्षित और अनुभवी अधिकारियों की आवश्यकता पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अधिकारी अयोग्य पाया जाता है, तो उसे हटाकर योग्य अधिकारी की नियुक्ति की जा सकती है।

विजय शाह प्रकरण की सुनवाई टली

इसी दिन मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से जुड़े विवादित बयान मामले की सुनवाई भी सूचीबद्ध थी, लेकिन समयाभाव के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली तारीख तय की जाएगी। माना जा रहा है कि माफी के बावजूद न्यायालय का रुख इस मामले में सख्त बना हुआ है।

निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ संकेत देता है कि चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़ी किसी भी जांच या सत्यापन में ढिलाई नहीं चलेगी। एसआईआर को लेकर अदालत की सख्ती आने वाले समय में सभी राज्यों के लिए एक स्पष्ट दिशानिर्देश के रूप में देखी जा रही है।

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