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By: Ravindra Sikarwar

ग्वालियर जिले में संचालित सभी निजी स्कूलों के लिए 31 दिसंबर 2025 आज अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि जिले के सभी मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों को अपनी फीस संरचना, स्टेशनरी, पाठ्यपुस्तकों तथा गणवेश से जुड़ी पूरी जानकारी विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://dpimp.in पर ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। यह प्रक्रिया पूरी तरह अनिवार्य है और आज रात 12 बजे के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा।

यह कदम अभिभावकों के हितों की रक्षा करने और निजी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगाने की दिशा में उठाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में ग्वालियर सहित पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा फीस, किताबें, गणवेश और अन्य शुल्कों में अत्यधिक वृद्धि की शिकायतें लगातार बढ़ी हैं। कई मामलों में अभिभावकों को मजबूरन महंगी किताबें और निर्धारित दुकानों से ही गणवेश खरीदने पड़ते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने यह नई व्यवस्था लागू की है।

क्या-क्या जानकारी अपलोड करनी होगी?
निजी स्कूलों को पोर्टल पर निम्नलिखित विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करने होंगे:

  • कक्षावार फीस संरचना: ट्यूशन फीस, प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, खेल शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क आदि सभी मदों की अलग-अलग राशि।
  • पाठ्यपुस्तकें: प्रत्येक कक्षा के लिए निर्धारित किताबों की सूची, प्रकाशक का नाम, संस्करण और मूल्य।
  • स्टेशनरी: कॉपी, पेन, ज्योमेट्री बॉक्स आदि की अनिवार्य या वैकल्पिक सूची और उनकी कीमतें।
  • गणवेश: स्कूल यूनिफॉर्म का पूरा विवरण, जिसमें शर्ट, पैंट/स्कर्ट, टाई, बैज, जूते-मोजे आदि शामिल हैं। साथ ही यह भी बताना होगा कि गणवेश कहां से खरीदा जा सकता है और उसकी अधिकतम कीमत क्या है।
  • अन्य शुल्क: ट्रांसपोर्ट फीस, कंप्यूटर फीस या कोई विशेष गतिविधि शुल्क यदि लागू हो।

यह सभी जानकारी स्पष्ट और पारदर्शी रूप से अपलोड करनी होगी ताकि अभिभावक आसानी से तुलना कर सकें और किसी भी तरह की मनमानी की शिकायत कर सकें।

नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
स्कूल शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित तिथि तक जानकारी अपलोड नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संभावित दंडों में शामिल हैं:

  • स्कूल की मान्यता पर प्रतिबंध या निलंबन।
  • जुर्माना लगाया जाना।
  • आगे की फीस वृद्धि पर रोक।
  • गंभीर मामलों में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सभी निजी स्कूलों को पहले ही कई बार नोटिस जारी कर यह जानकारी अपलोड करने के लिए कहा था। अब अंतिम तिथि होने के कारण विभाग ने विशेष टीम गठित की है जो पोर्टल पर अपलोडिंग की स्थिति की निगरानी कर रही है। ग्वालियर जिले में लगभग 800 से अधिक निजी स्कूल हैं, जिनमें सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्ड से संबद्ध संस्थान शामिल हैं।

अभिभावकों के लिए बड़ा लाभ
इस नई व्यवस्था से सबसे अधिक फायदा अभिभावकों को होगा। अब वे घर बैठे पोर्टल पर जाकर किसी भी स्कूल की फीस और अन्य खर्चों की तुलना कर सकेंगे। यदि कोई स्कूल निर्धारित शुल्क से अधिक वसूलता पाया जाता है या अभिभावकों को महंगी किताबें-गणवेश थोपता है, तो वे सीधे विभागीय पोर्टल या जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत दर्ज करा सकेंगे। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के स्कूल की अपलोडेड जानकारी अवश्य जांचें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत दें।

तकनीकी सहायता की व्यवस्था
कई स्कूल संचालकों को पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था, जिसके लिए विभाग ने हेल्पडेस्क और विशेष तकनीकी टीम तैनात की है। स्कूल प्रबंधन अंतिम समय में भी हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सहायता ले सकते हैं। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी समस्या का हवाला देकर समय सीमा बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं है।

यह पहल मध्य प्रदेश सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसमें निजी शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। ग्वालियर सहित पूरे प्रदेश के अभिभावक इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि इससे उनके बच्चों की शिक्षा पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम होगा। आज रात तक सभी स्कूलों द्वारा जानकारी अपलोड हो जाने की उम्मीद है, अन्यथा आने वाले दिनों में कई स्कूलों पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

अभिभावकों से अनुरोध है कि वे स्वयं पोर्टल https://dpimp.in पर जाकर अपने क्षेत्र के स्कूलों की जानकारी देखें और शिक्षा के अधिकार को मजबूत बनाने में सहयोग करें।