By: Ravindra Sikarwar
दुबई एयर शो 2025 के अंतिम दिन भारत का स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान हादसे का शिकार हो गया, जिसमें भारतीय वायुसेना के युवा और कुशल पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की मौत हो गई। यह खबर जैसे ही सामने आई, हिमाचल प्रदेश के नगरोटा बगवां के पटियालाकड़ गांव में मातम छा गया। 34 वर्षीय नमांश स्याल न केवल वायुसेना का एक होनहार पायलट थे, बल्कि अपने परिवार, साथियों और देश के लिए गर्व का प्रतीक भी थे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने एक बेहद साहसी और समर्पित योद्धा खो दिया है।
दुबई एयर शो 17 नवंबर से शुरू हुआ था और 21 नवंबर को इसका अंतिम प्रदर्शन होना था। तेजस विमान इन्हीं प्रदर्शनों का हिस्सा था, जहां भारत की ‘सूर्य किरण’ टीम भी मौजूद थी। अंतिम दिन हुए प्रदर्शन के दौरान तेजस विमान अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया और तेज़ धमाके के साथ जमीन से टकरा गया। वीडियो में दिखा कि कुछ ही सेकंड में आग और धुआं चारों तरफ फैल गया। हादसे के बाद भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने विंग कमांडर स्याल की बहादुरी को नमन किया और कहा कि देश उनकी वीरता को हमेशा याद रखेगा। यह तेजस विमान का दूसरा बड़ा हादसा है—पहला मार्च 2024 में जैसलमेर में हुआ था, जिसमें पायलट सुरक्षित बच गया था।
देश की सेवा के प्रति समर्पित—कौन थे विंग कमांडर नमांश स्याल?
हिमाचल के नगरोटा बगवां में जन्मे और पले-बढ़े विंग कमांडर नमांश स्याल ने अपनी शुरुआती शिक्षा सुजानपुर टीरा स्थित सैनिक स्कूल से हासिल की थी। वहीं से उनके भीतर भारतीय सेना और वायुसेना में सेवा देने का जुनून जागा। रिपोर्टों के अनुसार, स्याल ने NDA के हंटर स्क्वाड्रन में प्रशिक्षण लिया और बाद में एयर फोर्स एकेडमी से प्रशिक्षित होकर 24 दिसंबर 2009 को भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए। अपने अनुशासन, कौशल और शांत स्वभाव के कारण वे हमेशा अपने साथियों के बीच सम्मानित रहे।
उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और छह वर्ष की एक बेटी है। उनकी पत्नी भी भारतीय वायुसेना में अधिकारी हैं, जबकि उनके पिता जगन नाथ सेना में सेवा के बाद शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए। नमांश स्याल तमिलनाडु के सुलूर वायुसेना स्टेशन पर तैनात थे और वहीं से उनकी टोली को दुबई एयर शो के लिए भेजा गया था। हादसा जब हुआ, तब स्याल के माता-पिता हैदराबाद में अपने बेटे और बहू से मिलने के लिए गए हुए थे, जबकि हिमाचल स्थित उनका घर बंद पड़ा था। परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग इस बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि गांव का होनहार बेटा अब दुनिया में नहीं रहा।
तेजस हादसे ने उठाए कई सवाल, पर नमांश स्याल की बहादुरी अमर
तेजस लड़ाकू विमान भारत की स्वदेशी तकनीक का प्रतीक माना जाता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसका प्रदर्शन भारत की सामरिक क्षमता को दर्शाता है। लेकिन इस घटना ने विमान की सुरक्षा से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। यह दूसरी बार है जब तेजस विमान प्रदर्शन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, हालांकि अभी जांच पूरी होने का इंतजार है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं की गहराई से पड़ताल जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
हालांकि, तकनीकी सवालों से परे, विंग कमांडर नमांश स्याल की साहसिक उड़ान, समर्पण और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर रहेगी। उनके साथ जुड़े लोग बताते हैं कि वे हमेशा मुस्कुराते रहते थे और अपने काम को लेकर बेहद गंभीर रहते थे। देश की सेवा उनके लिए केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य था। तेजस विमान हादसे की इस त्रासदी ने भारतीय वायुसेना के एक उज्ज्वल सितारे को हमसे छीन लिया, लेकिन उनकी वीरता की गूंज हमेशा यादों में जिंदा रहेगी।
