दिल्ली के पॉश इलाके सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए भीषण बिल्डिंग हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। पीजी (PG) के रूप में इस्तेमाल हो रही इस पुरानी इमारत के ढहने से 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस की एफआईआर (FIR) से बेहद चौंकाने वाले और गंभीर खुलासे सामने आए हैं, जिससे मकान मालिकों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
कमजोर नींव और लोड क्षमता की अनदेखी कर खड़ी की गईं मंजिलें
पुलिस की एफआईआर के अनुसार, यह इमारत काफी पुरानी थी और इसके मालिकों (हरिराम बंसल और उनके भाई) को अच्छी तरह पता था कि इस पुरानी बिल्डिंग की नींव और भार उठाने की क्षमता (Load-Bearing Capacity) अतिरिक्त वजन सहने के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बावजूद, ज्यादा किराए और मुनाफे की लालच में उन्होंने पुरानी और कमजोर संरचना के ऊपर चार और मंजिलें खड़ी करवा दीं। पुलिस का कहना है कि यह अवैध और जोखिम भरा निर्माण वहां रहने वाले दर्जनों छात्रों और अन्य लोगों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ था।
बेसमेंट में चल रहा था रेनोवेशन का काम, पुलिस ने तीन को दबोचा
हादसा रविवार की दोपहर करीब 1 बजे हुआ, जब ग्राउंड फ्लोर और उसके ऊपर बनी चार मंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयनों से यह बात सामने आई है कि हादसे से कुछ समय पहले बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा था। अतिरिक्त डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल के मुताबिक, मुख्य आरोपी हरिराम ने बेसमेंट में काम चलने की बात कबूल कर ली है, और वहां काम कर रहे एक घायल मजदूर ने भी इसकी पुष्टि की है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या बेसमेंट की खुदाई या रेनोवेशन की वजह से इस कमजोर ढांचे की नींव और ज्यादा हिल गई थी।
प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा जांच के कड़े निर्देश
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF), एफएसएल (FSL) और दमकल विभाग की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन नींद से जागा है, और राजधानी में चल रहे सभी पीजी व कोचिंग सेंटरों की बिल्डिंगों की सुरक्षा और वैधता की कड़ी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
