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by-Ravindra Sikarwar

काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हालिया सीमा संघर्ष के बाद सोशल मीडिया पर ‘93000 पैंट्स’ ट्रेंडिंग हो रहा है, जो पाकिस्तान की 1971 की शर्मनाक हार की याद दिला रहा है। यह ट्रेंड तब शुरू हुआ जब तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तानी सैनिकों की कथित रूप से छोड़ी गई पैंट्स को परेड करते हुए वीडियो शेयर किए, जिसे अफगान यूजर्स ने ‘93000 पैंट्स सेरेमनी 2.0’ का नाम दिया। यह मजाक पाकिस्तान की सैन्य असफलता पर व्यंग्य है, जहां अफगान कार्यकर्ताओं ने इसे 1971 की घटना से जोड़ा, जब 93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण किया था।

संघर्ष की शुरुआत 9 अक्टूबर 2025 को हुई, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खोस्त, पक्तिका और जलालाबाद में हवाई हमले किए, जिसमें टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सदस्यों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में तालिबान ने पाकिस्तानी चौकियों पर हमले किए और दावा किया कि उन्होंने कई सैनिकों को मार गिराया तथा हथियार जब्त किए। 15 अक्टूबर को दोनों पक्षों ने 48 घंटे का संघर्ष विराम घोषित किया, लेकिन जल्द ही इसका उल्लंघन हो गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, जिसमें तालिबान लड़ाके पाकिस्तानी सैनिकों की पैंट्स को लहराते दिखे, दावा करते हुए कि सैनिक भागते समय इन्हें छोड़ गए।

यह ट्रेंड 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ा है, जब पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया। उस समय 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया गया और ऐतिहासिक रूप से ‘पैंट रिमूवल सेरेमनी’ की बात कही जाती है, जहां सैनिकों को आत्मसमर्पण के प्रतीक के रूप में पैंट उतारने को मजबूर किया गया। दुश्मन द्वारा हथियार छीनने और अपमानजनक तरीके से समर्पण कराने की यह घटना पाकिस्तान के इतिहास में एक काला अध्याय है। अब अफगान यूजर्स इसे दोहराव के रूप में देख रहे हैं, जहां पाकिस्तानी सैनिक फिर से ‘पैंट्स’ छोड़कर भागे।

सोशल मीडिया पर अफगान उपयोगकर्ताओं ने पाकिस्तान की सैन्य क्षमता का मजाक उड़ाया। एक यूजर ने लिखा, “1971 में 93000 पैंट्स भारत को सौंपे गए, अब अफगानिस्तान को।” दूसरे ने कहा, “पाकिस्तान की सेना की पैंट्स गिरने की परंपरा जारी है।” यह ट्रेंड एक्स (पूर्व ट्विटर) पर तेजी से फैला, जहां ‘93000’ हैशटैग टॉप ट्रेंड्स में शामिल हो गया। अफगान पत्रकारों ने इसे 1971 की याद के रूप में देखा, जहां पाकिस्तान को अपमानजनक हार मिली।

पाकिस्तान ने इन वीडियो को फर्जी बताया और कहा कि यह प्रोपेगैंडा है। हालांकि, तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने कई पाकिस्तानी चौकियां कब्जे में लीं और सैनिक भाग गए। इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया, जहां पाकिस्तान टीटीपी को शरण देने का आरोप लगाता है, जबकि अफगानिस्तान इसे अस्वीकार करता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने की अपील की, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मजाक का विषय बन गया।

यह ट्रेंड न केवल सैन्य संघर्ष को उजागर करता है, बल्कि ऐतिहासिक घावों को भी कुरेदता है, जहां पाकिस्तान की सेना की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। अफगान उपयोगकर्ताओं का कहना है कि सम्मान एक बार खोया तो वापस नहीं मिलता, और 93000 की घटना इसका प्रमाण है।

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