by-Ravindra Sikarwar
अंगड़िया एक सदियों पुरानी अनौपचारिक वित्तीय व्यवस्था है, जो मुख्य रूप से व्यापारियों और ज्वेलर्स के बीच नकदी, आभूषणों और मूल्यवान वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होती है। यह सिस्टम गुजरात से उत्पन्न हुआ और आज भी मुंबई-सूरत जैसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों पर सक्रिय है। इसमें ‘अंगड़िया’ नामक कूरियर व्यक्ति या नेटवर्क शामिल होता है, जो कोड वर्ड्स या विशेष संकेतों के आधार पर काम करता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यापारी मुंबई से सूरत तक लाखों रुपये भेजना चाहे, तो वह अंगड़िया को नकदी सौंपता है, जो 24 घंटे के अंदर डिलीवर कर देता है। यह पूरी तरह विश्वास पर टिका होता है, क्योंकि कोई लिखित दस्तावेज या बैंक रिकॉर्ड नहीं होते। प्रति ट्रांजेक्शन न्यूनतम शुल्क लिया जाता है, और कभी-कभी करोड़ों की राशि का लेन-देन होता है।
हालांकि यह प्रणाली कानूनी है और पारंपरिक व्यापार को सुगम बनाती है, लेकिन अब इसका दुरुपयोग साइबर ठगों द्वारा किया जा रहा है। ठग पहले फोन या व्हाट्सऐप पर पीड़ित को धमकाते हैं—जैसे मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम आने या काल्पनिक जांच का डर दिखाकर—और उन्हें बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। एक बार राशि प्राप्त होने पर, धोखेबाज इसे तुरंत निकाल लेते हैं और फिर अंगड़िया के माध्यम से नकदी रूप में दूसरे राज्य या शहर भेज देते हैं। इससे पुलिस ट्रेसिंग मुश्किल हो जाती है, क्योंकि बैंकिंग सिस्टम से बाहर होने के कारण कोई डिजिटल ट्रेल नहीं बचता।
एक ताजा घटना में, दिल्ली की एक नर्सिंग अधिकारी को जुलाई में फर्जी पुलिस कॉल से डराकर 7 लाख रुपये ट्रांसफर करने पड़े। जांच में पता चला कि ठगों ने पैसे को अंगड़िया के जरिए स्थानांतरित कर दिया था, जिससे ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका ‘डार्क पैटर्न’ का हिस्सा है, जहां अपराधी पारंपरिक नेटवर्क का फायदा उठाते हैं ताकि आधुनिक वित्तीय निगरानी से बच सकें। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऐसे मामलों में 70% से अधिक फंड ट्रांसफर अनट्रेसेबल हो जाते हैं।
अंगड़िया सिस्टम की विशेषताएं:
- विश्वास आधारित: कोई अनुबंध नहीं, सिर्फ लंबे समय के रिश्ते।
- कोड सिस्टम: ‘जोखिम’ या ‘जेवर’ जैसे शब्दों से सामान की पहचान।
- मार्ग: मुख्यतः मुंबई-अहमदाबाद-सूरत, लेकिन पूरे देश में फैला।
- चुनौतियां: काला धन ट्रांसफर के संदेह के कारण नियामक जांच का सामना।
ठगों से बचाव के उपाय:
- अज्ञात कॉल्स पर पैनिक न करें; हमेशा आधिकारिक स्रोतों से सत्यापन करें।
- राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर तुरंत शिकायत दर्ज करें।
- बड़े ट्रांजेक्शन से पहले कुल राशि और ट्रेल चेक करें।
- जागरूकता फैलाएं: परिवार और दोस्तों को ऐसी स्कैम्स के बारे में बताएं।
सरकार और पुलिस अब अंगड़िया नेटवर्क पर सख्ती बरत रही है, ताकि वैध व्यापार प्रभावित न हो लेकिन अपराध रोका जा सके। यह पुरानी प्रथा आधुनिक अपराध का नया माध्यम न बने, इसके लिए डिजिटल साक्षरता जरूरी है।
