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by-Ravindra Sikarwar

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विभिन्न सार्वजनिक बयान दिए हैं, जिसमें एक सोशल मीडिया पोस्ट भी शामिल है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका ने “सबसे गहरे, सबसे काले चीन” के हाथों “भारत और रूस को खो दिया है।” इस बयान के बाद, उन्होंने “डैमेज कंट्रोल” (नुकसान नियंत्रण) का प्रयास किया और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी दोस्ती और दोनों देशों के बीच “विशेष संबंध” की बात कही।

ट्रंप का विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट:
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिका की विदेश नीति पर अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने चीन को बहुत कुछ दिया है, जिससे चीन की आर्थिक और सैन्य शक्ति बढ़ गई है, और इसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने “भारत और रूस को सबसे गहरे, सबसे काले चीन के हाथों खो दिया है।”

इस बयान को भारत और रूस के साथ अमेरिका के मौजूदा संबंधों को लेकर एक गंभीर टिप्पणी के रूप में देखा गया, जिसमें ट्रंप ने संकेत दिया कि दोनों देश चीन के प्रभाव में आ रहे हैं। इस बयान से वैश्विक कूटनीति में हलचल मच गई, क्योंकि यह भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों के आधिकारिक रुख के विपरीत था।

“डैमेज कंट्रोल” का प्रयास:
अपने विवादित बयान के तुरंत बाद, ट्रंप ने अपने रुख में बदलाव लाने का प्रयास किया। उन्होंने एक और बयान जारी किया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी दोस्ती और भारत के साथ अमेरिका के “विशेष संबंधों” पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि “मेरा भारत से गहरा लगाव है और मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक प्रधानमंत्री मोदी हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके शासनकाल में भारत और अमेरिका के बीच संबंध सबसे मजबूत थे। यह बयान उनके पहले वाले पोस्ट के विपरीत था और इसे उनके द्वारा अपने बयान से हुए कूटनीतिक नुकसान को कम करने के प्रयास के रूप में देखा गया।

कूटनीतिक निहितार्थ:
ट्रंप के ये दोनों बयान भारत-अमेरिका संबंधों की जटिलता को उजागर करते हैं।

  • चीन के प्रति भारत और रूस का झुकाव: ट्रंप का मूल बयान इस चिंता को दर्शाता है कि चीन का बढ़ता आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भारत और रूस को अमेरिका से दूर कर सकता है। भारत, चीन के साथ अपने सीमा विवादों के बावजूद, ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों पर चीन और रूस के साथ मिलकर काम करता है।
  • घरेलू राजनीति का प्रभाव: कई विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का बयान घरेलू अमेरिकी राजनीति से प्रेरित था। वे मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की विदेश नीति की आलोचना कर रहे थे और खुद को एक मजबूत और कुशल नेता के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे थे जो अमेरिका के हितों की रक्षा कर सकता है।
  • संबंधों का द्विपक्षीय दृष्टिकोण: भारत और अमेरिका के बीच संबंध सिर्फ एक नेता पर निर्भर नहीं हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में एक मजबूत और बहुआयामी साझेदारी है। हालांकि, ट्रंप के बयान ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या अमेरिका भारत को एक विश्वसनीय भागीदार मानता है, खासकर जब भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार अन्य देशों, जैसे रूस, से संबंध बनाए रखता है।

कुल मिलाकर, ट्रंप के बयानों ने वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को लेकर चल रही बहस को फिर से हवा दी है।