Report by: Rupesh Soni
Hazaribagh : जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र स्थित कुसुंबा गांव में एक मासूम बच्ची के साथ हुई हृदयविदारक और जघन्य घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ रविवार को महिलाओं, युवतियों और छोटी बच्चियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। न्याय की मांग को लेकर निकाला गया यह कैंडल मार्च केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और बेटियों के सम्मान के लिए एक बुलंद आवाज बनकर उभरा।

झुमरा चौक से दारू तक ‘इंसाफ’ की गूंज
Hazaribagh रविवार की शाम जैसे ही सूरज ढला, विष्णुगढ़ का झुमरा चौक प्रदर्शनकारियों की भीड़ से भर गया। हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां और आंखों में इंसाफ की उम्मीद लिए सैकड़ों महिलाएं और बच्चियां इस मार्च में शामिल हुईं।
- मार्च का रूट: यह कैंडल मार्च झुमरा चौक से प्रारंभ होकर दारू तक पहुंचा। लंबी कतारों में चल रहे लोगों ने पूरे रास्ते प्रशासन के खिलाफ और पीड़िता के पक्ष में नारेबाजी की।
- आक्रोश और गम: मार्च के दौरान पूरे क्षेत्र का माहौल गमगीन था। लोग इस बात से आक्रोशित थे कि एक मासूम के साथ इतनी बर्बरता कैसे की गई। हाथों में लिए पोस्टरों पर “बेटी को न्याय दो” और “दोषियों को फांसी दो” जैसे नारे साफ तौर पर जनता की मांग को बयां कर रहे थे।
प्रशासन को अल्टीमेटम: सख्त सजा और सुरक्षा की मांग
Hazaribagh प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऐसी जघन्य घटनाएं समाज के माथे पर कलंक हैं और अपराधियों में कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।
महिलाओं ने मांग की कि:
- मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए ताकि जल्द न्याय मिल सके।
- अपराधियों को ऐसी कड़ी सजा दी जाए जो समाज में मिसाल बने।
- विष्णुगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि महिलाएं और बच्चियां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता और संघर्ष का संकल्प
Hazaribagh इस कैंडल मार्च का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना ही नहीं था, बल्कि पीड़ित परिवार को यह संदेश देना भी था कि इस दुख की घड़ी में पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। मार्च के अंत में मौन धारण कर मासूम के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि जब तक आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और मासूम को इंसाफ नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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