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By: Ravindra Sikarwar

US news: वेनेजुएला की राजधानी कराकास में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ने की घटना ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। यह ऑपरेशन 3 जनवरी 2026 की रात को हुआ, जिसमें अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर हमले किए और मादुरो दंपति को न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर ड्रग तस्करी और हथियार संबंधी आरोपों का मुकदमा चलेगा। इस घटना के एक दिन बाद भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें स्थिति को गहरी चिंता का विषय बताया गया है। भारत ने शांतिपूर्ण समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की है।

अमेरिकी ऑपरेशन का विवरण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस ऑपरेशन की घोषणा की और कहा कि यह एक सटीक और सफल कार्रवाई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी डेल्टा फोर्स और अन्य स्पेशल यूनिट्स ने रात के अंधेरे में कराकास पर हमला किया। वेनेजुएला की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने के बाद हेलीकॉप्टरों से सैनिक उतारे गए और मादुरो को उनके ठिकाने से पकड़ा गया।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर मादुरो की हथकड़ी और आंखों पर पट्टी बंधी तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्हें अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस इवो जिमा पर दिखाया गया। इसके बाद दंपति को न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां वे नार्को-टेररिज्म के आरोपों का सामना करेंगे। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला को चलाएगा और तेल उद्योग में मजबूत भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह ऑपरेशन ड्रग तस्करी रोकने के लिए था, क्योंकि मादुरो पर 50 मिलियन डॉलर का इनाम था।

यह कार्रवाई मादुरो के 12 साल के शासन का अंत लगती है, जिन पर चुनाव में धांधली और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं।

भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने 4 जनवरी 2026 को बयान जारी कर कहा कि वेनेजुएला में हो रहे विकास गहरी चिंता का विषय हैं और भारत स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। बयान में कहा गया, “भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए अपना समर्थन दोहराता है। हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि मुद्दों को संवाद के माध्यम से शांतिपूर्वक सुलझाएं, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।”

एमईए ने यह भी बताया कि कराकास स्थित भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के संपर्क में है और हर संभव मदद मुहैया कराएगा। साथ ही, गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी की गई है। भारत की यह प्रतिक्रिया संतुलित है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देती है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और विवाद

यह घटना अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कई देशों ने अमेरिका की निंदा की है। ब्राजील, कोलंबिया, मैक्सिको, रूस, चीन और ईरान ने इसे संप्रभुता पर हमला बताया। चीन ने मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की। वहीं, कुछ देशों जैसे अर्जेंटीना ने इसे स्वागतयोग्य कदम माना।

वेनेजुएला में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम नेतृत्व संभाला और अमेरिकी कार्रवाई को अपहरण करार दिया। विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने इसे स्वतंत्रता का क्षण बताया, लेकिन ट्रंप ने उन्हें नेतृत्व के लिए उपयुक्त नहीं माना।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऑपरेशन कानूनी रूप से विवादास्पद है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हो सकता है। तेल संसाधनों पर अमेरिकी नियंत्रण की बात ने भी सवाल उठाए हैं।

आगे की स्थिति और प्रभाव

वेनेजुएला में अस्थिरता बढ़ सकती है, क्योंकि सेना और सरकारी तंत्र अभी भी मादुरो समर्थक हैं। लाखों वेनेजुएला नागरिकों ने विदेशों में शरण ली हुई है, और यह घटना प्रवासियों पर असर डालेगी। भारत जैसे देशों के लिए यह घटना क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय नियमों की याद दिलाती है।

यह विकास 2026 की शुरुआत में ही वैश्विक राजनीति को नया मोड़ दे रहा है। भारत की संयमित प्रतिक्रिया उसके गैर-हस्तक्षेप नीति को दर्शाती है, जबकि स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

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