by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते व्यापार तनाव के चलते अमेरिकी व्यापार टीम की भारत यात्रा को फिलहाल टाल दिया गया है। यह दौरा 25 से 29 अगस्त तक होने वाला था, जिसमें दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के छठे दौर की बातचीत होनी थी।
शुल्क में 50% की बढ़ोतरी:
इस स्थगन का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारतीय निर्यात पर 50% तक का भारी शुल्क लगाना है। पहले से ही 25% शुल्क लागू था, लेकिन रूस से कच्चे तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के कारण भारत पर 25% का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया गया है, जो 27 अगस्त से लागू होगा।
भारत का रुख:
भारत ने इस कदम को “अनुचित” और “अतार्किक” बताया है। भारत का कहना है कि वह अपनी विदेश नीति के तहत रूस से ऊर्जा और अन्य सामान खरीदता रहेगा, खासकर जब अन्य देश भी ऐसा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने भी हाल ही में कहा था कि भारत अपने किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा, खासकर कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। अमेरिका इन क्षेत्रों में भारतीय बाजार तक अधिक पहुंच चाहता है, जिसका भारत विरोध कर रहा है।
आगे की राह:
इस स्थगन के बाद, दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का सितंबर-अक्टूबर का लक्ष्य अनिश्चित हो गया है। हालांकि, दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं, लेकिन फिलहाल बातचीत के लिए कोई नई तारीख तय नहीं की गई है। इस घटनाक्रम से भारत के निर्यातकों पर भी दबाव बढ़ गया है, जिनके लिए अमेरिकी बाजार बहुत महत्वपूर्ण है।
