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by-Ravindra Sikarwar

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा, क्योंकि यह उसके राष्ट्रीय हित में है। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि भारत उस देश से तेल खरीदना जारी रखेगा जो “सबसे अच्छा सौदा” देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने का दबाव बनाने के लिए कुछ भारतीय आयातों पर टैरिफ लगाए हैं।

भारत का दृष्टिकोण और तर्क:
भारत ने अपनी तेल खरीद नीति को लेकर कई तर्क दिए हैं, जो मुख्यतः उसकी ऊर्जा सुरक्षा और बाज़ार की ज़रूरतों पर आधारित हैं।

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत का मुख्य उद्देश्य अपनी 1.4 अरब की विशाल आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर, भारत अपने नागरिकों के लिए ऊर्जा की लागत को कम कर रहा है।
  • बाजार का तर्क: भारत अपनी तेल खरीद को विशुद्ध रूप से बाजार के तर्क के रूप में देखता है। यह नीति सिर्फ रूस के साथ ही नहीं, बल्कि अन्य सभी देशों के साथ भी लागू होती है, जहां से भारत को सबसे अच्छी कीमत मिलती है।
  • वैश्विक बाजार में स्थिरता: भारत का मानना है कि रूसी तेल के अपने आयात को बढ़ाकर, उसने वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने में मदद की है। अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदता, तो बाजार में आपूर्ति की कमी हो सकती थी, जिससे तेल की कीमतें और बढ़ सकती थीं।

अमेरिका का दबाव और भारत की प्रतिक्रिया:
अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन भारत ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का रुख अपनाया है।

  • टैरिफ: अमेरिकी सरकार ने भारत के कुछ आयातों पर टैरिफ लगाए हैं, जिनमें से कुछ वस्तुओं पर 50% तक का टैरिफ है। UPI.com की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 25% का दंडात्मक हिस्सा भी शामिल है, जो रूस से तेल खरीद जारी रखने के लिए लगाया गया है।
  • आरोपों को खारिज: इंडिया टीवी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने उन दावों को सख्ती से खारिज कर दिया है कि उसकी तेल खरीद रूस के युद्ध प्रयासों को वित्त पोषित कर रही है। भारत ने यह स्पष्ट किया है कि उसकी नीति केवल अपनी आर्थिक ज़रूरतों पर आधारित है।
  • राष्ट्रीय हित पर जोर: भारत ने यह दृढ़ता से कहा है कि वह अपने “राष्ट्रीय हित” की रक्षा करने वाले कदम उठाना जारी रखेगा। इस बयान से यह साफ है कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में आकर अपनी विदेश नीति में बदलाव नहीं करेगा।

इस पूरे प्रकरण में, भारत ने अपनी आर्थिक संप्रभुता और विदेश नीति की स्वतंत्रता को दर्शाया है। भारत ने यह संदेश दिया है कि वह अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देगा, भले ही उसे प्रमुख शक्तियों से कुछ दबाव का सामना करना पड़े।