By: Ravindra Sikarwar
US news: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जनवरी 2026 को एक बड़ा बयान दिया, जिसमें उन्होंने वेनेजुएला पर सैन्य हमले की पुष्टि की और दावा किया कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया गया है। ट्रंप के अनुसार, यह ऑपरेशन लंबे समय से योजना बनाई जा रही थी और अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से इसे अंजाम दिया गया। इस सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक और सुरक्षा संकट गहरा गया है।
हमला: वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका का सैन्य ऑपरेशन
अमेरिकी सेना ने शनिवार रात को वेनेजुएला की राजधानी काराकस समेत अन्य इलाकों पर हमला किया। धमाकों से पूरा शहर दहल उठा और कई क्षेत्रों में अंधेरा छा गया। हमले के दौरान, अमेरिकी लड़ाकू विमानों की आवाजें और धमाकों से जनता में घबराहट फैल गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काराकस में सात बड़े धमाके सुने गए। इसके बाद, वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की, लेकिन कुछ ही समय बाद यह खबरें सामने आईं कि उन्हें पकड़ लिया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सैन्य ऑपरेशन को एक निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला में ड्रग तस्करी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ किसी भी दबाव को नहीं सहने वाला है। ट्रंप का यह भी दावा था कि मादुरो के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिकी एजेंसियों का सहयोग था।
मादुरो के खिलाफ अमेरिका के आरोप
ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर कई आरोप लगाए हैं, जिनमें प्रमुख आरोप देश में ड्रग तस्करी और अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारों का उल्लंघन शामिल हैं। ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारों को अवैध रूप से छीन लिया और इसके साथ ही वेनेजुएला अमेरिका में खतरनाक ड्रग्स की तस्करी कर रहा है। अमेरिका की यह कार्रवाई इन मुद्दों को लेकर थी, और इसे “तख्तापलट” के तौर पर भी देखा जा रहा है क्योंकि मादुरो का रुख हमेशा से अमेरिका के खिलाफ रहा है।
हमले का असर: वेनेजुएला में सुरक्षा संकट
अमेरिका के हमले के बाद, वेनेजुएला में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति गंभीर हो गई है। राजधानी काराकस समेत कई अन्य प्रमुख प्रांतों में हमलों की खबरें आईं। हमलों के बाद, स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई क्षेत्रों में बिजली भी चली गई, और स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई।
हमले के बाद, वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने सरकार के टीवी चैनल पर बयान दिया और अमेरिका से मादुरो के जीवित होने के सबूत और उनके ठिकाने की जानकारी देने की मांग की। रोड्रिगेज ने इस हमले को गलत और अवैध बताते हुए ट्रंप प्रशासन से इस बारे में स्पष्टता की मांग की।
हमले के प्रमुख ठिकाने
अमेरिका ने वेनेजुएला में कई प्रमुख सैन्य ठिकानों और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए। इनमें शामिल हैं:
- फुएर्ते टियुना: यह वेनेजुएला का सबसे बड़ा सैन्य बेस है, जो राजधानी काराकस में स्थित है।
- ला कार्लोटा एयरबेस: यह एयरबेस काराकस का मुख्य एयरबेस है, जो सैन्य और नागरिक उड़ानों के लिए उपयोग होता था।
- एल वोलकान: यह एक प्रमुख संचार केंद्र था, जो काराकस की पहाड़ियों में स्थित था।
- ला ग्वाइरा पोर्ट: यह वेनेजुएला का मुख्य बंदरगाह था, जो कैरिबियन तट पर स्थित था और काराकस के पास था।
वेनेजुएला का भविष्य: अनिश्चितता का दौर
इस सैन्य कार्रवाई के बाद, वेनेजुएला में भविष्य के राजनीतिक हालात और सुरक्षा स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। मादुरो के पकड़े जाने के बाद, सत्ता का खालीपन पैदा हुआ है और सुरक्षा स्थिति भी बेहद चिंताजनक बन गई है। देश में अंतरराष्ट्रीय दबाव और आंतरिक अस्थिरता ने वेनेजुएला को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां आने वाले दिनों में हालात और भी कठिन हो सकते हैं।
अमेरिकी हमले की वजहें:
अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के पीछे कुछ मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
- तेल कंपनियों का विवाद: अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारों को अवैध रूप से छीन लिया है।
- ड्रग तस्करी: ट्रंप का दावा है कि वेनेजुएला अमेरिका में खतरनाक ड्रग्स की तस्करी करता है, और इसके लिए कुछ समय पहले अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की नावों पर हमला भी किया था।
- तख्तापलट की कोशिश: मादुरो का रुख हमेशा से अमेरिका विरोधी रहा है, और इसके चलते अमेरिका उसे तख्तापलट करने का प्रयास कर रहा है।
इस घटनाक्रम ने दुनिया भर में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है और अब सभी की निगाहें वेनेजुएला की आगामी स्थिति पर टिकी हुई हैं।
