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By: Ravindra Sikarwar

US news: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और देश पर प्रभावी नियंत्रण के बाद भारत को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंधों में छूट से भारतीय कंपनियों के लंबे समय से अटके करीब एक अरब डॉलर के बकाए की वसूली हो सकती है, साथ ही तेल उत्पादन में तेजी आएगी। हालांकि, भारत सरकार ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

अमेरिकी कार्रवाई का प्रभाव

अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया गया। उन्हें नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के आरोपों में न्यूयॉर्क ले जाया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका अब वेनेजुएला को “चलाएगा” और तेल क्षेत्र का पुनर्गठन करेगा। इस कदम से वेनेजुएला की राज्य तेल कंपनी PDVSA पर अमेरिकी प्रभाव बढ़ेगा।

भारत के लिए संभावित लाभ

भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उत्पादन घटकर मात्र 5-10 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया है, जबकि पहले भारत यहां से लाखों बैरल तेल आयात करता था।

  • बकाया राशि की वसूली: वेनेजुएला ने 2014 तक OVL को 53.6 करोड़ डॉलर का लाभांश नहीं दिया, और बाद की अवधि के लिए भी समान राशि बकाया है। कुल मिलाकर करीब एक अरब डॉलर अटका हुआ है। अमेरिकी नियंत्रण में प्रतिबंध हटने से यह राशि वसूलना आसान हो सकता है।
  • उत्पादन में वृद्धि: प्रतिबंध हटने पर OVL आवश्यक उपकरण और तकनीक ले जा सकेगी, जिससे उत्पादन 80-100 हजार बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। भारतीय कंपनियां काराबोबो-1 जैसे अन्य क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा सकती हैं।
  • तेल आयात पर प्रभाव: वेनेजुएला से सस्ता तेल मिलने से भारत की रूस पर निर्भरता कम हो सकती है, और ऊर्जा विविधीकरण मजबूत होगा।

रूस पर संभावित असर

वेनेजुएला से तेल आपूर्ति बढ़ने से भारत की रूस से खरीद घट सकती है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव ला सकता है।

शशि थरूर की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर को लगातार अनदेखा किया जा रहा है, और अब “जंगल का कानून” चल रहा है जहां “ताकत ही सही” का सिद्धांत हावी है। थरूर ने इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया और दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाया।

यह घटनाक्रम न केवल वेनेजुएला की राजनीति बदल रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। भारत के लिए अवसर हैं, लेकिन स्थिरता और कानूनी मुद्दे चुनौतियां बने हुए हैं।

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