by-Ravindra Sikarwar
फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक आशाजनक प्रायोगिक एमआरएनए कैंसर वैक्सीन विकसित किया है, जिसने चूहों पर महत्वपूर्ण परिणाम दिखाए हैं। यह संभावित रूप से “यूनिवर्सल” कैंसर वैक्सीन का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
एनडीटीवी और यूनिवर्सिटी वर्ल्ड न्यूज के अनुसार, यह टीका विशिष्ट कैंसर प्रोटीन को लक्षित नहीं करता है, बल्कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की ट्यूमर के खिलाफ प्रतिक्रिया को बढ़ाता है, ठीक उसी तरह जैसे शरीर किसी वायरस से लड़ता है। नेचर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में प्रकाशित यह शोध बताता है कि यह दृष्टिकोण एक व्यापक रूप से प्रभावी और “ऑफ-द-शेल्फ” (ready to use) कैंसर वैक्सीन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
टीका कैसे काम करता है?
फ्लोरिडा विश्वविद्यालय की टीम ने एक एमआरएनए वैक्सीन बनाया है, जिसे ट्यूमर के भीतर पीडी-एल1 (PD-L1) नामक प्रोटीन की अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। साइंसडेली के अनुसार, पीडी-एल1 में यह वृद्धि ट्यूमर को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है, खासकर जब इसे इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर (एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी दवा) के साथ जोड़ा जाता है।
पारंपरिक कैंसर टीकों के विपरीत, जो विशिष्ट ट्यूमर प्रोटीन को लक्षित करते हैं, यह दृष्टिकोण कैंसर के खिलाफ एक सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय करने का लक्ष्य रखता है, जिससे यह संभावित रूप से कैंसर की एक विस्तृत श्रृंखला के खिलाफ प्रभावी हो सकता है।
प्रारंभिक परिणाम और भविष्य की योजनाएँ:
- प्रीक्लिनिकल परिणाम: चूहों पर किए गए परीक्षणों में, इस टीके ने इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर के साथ मिलकर एक मजबूत एंटीट्यूमर प्रभाव दिखाया। कुछ मामलों में, अकेले इस टीके ने भी ट्यूमर को खत्म कर दिया।
- क्लीनिकल ट्रायल: यूट्यूब की रिपोर्ट के अनुसार, यूएफ हेल्थ के बाल रोग विशेषज्ञ और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एलियास सयौर सहित शोध दल, इन निष्कर्षों को क्लीनिकल ट्रायल में बदलने के प्रयास का नेतृत्व कर रहा है।
यह अध्ययन एक ऐसे भविष्य की आशा प्रदान करता है जहां कैंसर का उपचार सर्जरी, विकिरण या कीमोथेरेपी पर कम और इम्यूनोथेरेपी और टीकों पर अधिक निर्भर हो सकता है, जिससे संभावित रूप से कैंसर के उपचार के लिए एक अधिक व्यक्तिगत दृष्टिकोण विकसित हो सकता है।
