by-Ravindra Sikarwar
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार युद्ध को नई ऊंचाई दे दी है। चीन द्वारा हाल ही में लगाए गए दुर्लभ मिट्टी और महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात प्रतिबंधों का जवाब देते हुए, ट्रंप ने चीनी उत्पादों पर 100% टैरिफ की घोषणा कर दी है। यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चीन की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, लेकिन इससे वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है। व्हाइट हाउस ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला’ बताते हुए तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश जारी किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका-चीन संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है, जबकि भारत जैसे देशों के लिए अवसर पैदा कर सकता है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
चीन के प्रतिबंध: दुर्लभ मिट्टी पर लगी रोक का पूरा ब्योरा
यह विवाद 5 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ, जब बीजिंग ने अमेरिकी प्रतिबंधों का जवाब देते हुए दुर्लभ मिट्टी तत्वों (आरईई) और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगा दिए। चीन, जो वैश्विक दुर्लभ मिट्टी उत्पादन का 80% से अधिक हिस्सा नियंत्रित करता है, ने कहा कि ये प्रतिबंध अमेरिकी कंपनियों द्वारा चीनी तकनीक चोरी के आरोपों के जवाब में हैं। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा उपकरणों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में होता है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, “अमेरिका ने हमारी संप्रभुता का उल्लंघन किया है। हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।” इस प्रतिबंध से अमेरिकी कंपनियां, जैसे टेस्ला, एप्पल और लॉकहीड मार्टिन, प्रभावित हुई हैं। अमेरिकी व्यापार विभाग के अनुसार, चीन से आयात होने वाले इन सामग्रियों की कीमतें रातोंरात 200% तक बढ़ गईं, जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि हुई। ट्रंप प्रशासन ने इसे ‘आर्थिक युद्ध का ऐलान’ माना और तत्काल प्रतिक्रिया की।
ट्रंप की घोषणा: 100% टैरिफ का दायरा और प्रभाव
10 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, “चीन ने हमें धोखा दिया है। वे सोचते हैं कि वे दुनिया को बंधक बना सकते हैं। अब समय आ गया है कि हम अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।” उन्होंने चीनी आयातों पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो 1 नवंबर से लागू हो जाएगा। यह टैरिफ इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन, स्टील और उपभोक्ता वस्तुओं सहित 500 अरब डॉलर के चीनी आयातों पर लगेगा।
ट्रंप के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो ने स्पष्ट किया कि यह कदम अमेरिकी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए है। “हम ‘मेक इन अमेरिका’ को वास्तविकता बनाएंगे। चीन को सजा मिलेगी, और हमारे श्रमिकों को नौकरियां,” उन्होंने कहा। व्हाइट हाउस के अनुसार, इससे अमेरिकी राजस्व में 200 अरब डॉलर की वृद्धि होगी, जो बुनियादी ढांचे और रक्षा पर खर्च किया जाएगा। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें 20-30% बढ़ सकती हैं।
वैश्विक बाजारों पर असर: शेयरों में गिरावट, मुद्रा में उतार-चढ़ाव
ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद वैश्विक बाजार हिल गए। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर डाउ जोन्स इंडेक्स 3% गिर गया, जबकि नास्डैक 4% नीचे आ गया। चीनी शेयर बाजार शंघाई कंपोजिट में 2.5% की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर की कीमत मजबूत हुई, लेकिन यूआन 1.5% कमजोर पड़ गया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यह व्यापार युद्ध 2018-2019 के स्तर से भी बुरा हो सकता है, जब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर अरबों डॉलर के टैरिफ लगाए थे।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा, “यह कदम वैश्विक विकास को 0.5% तक प्रभावित कर सकता है। सभी पक्षों को संवाद की मेज पर आना चाहिए।” यूरोपीय संघ और जापान ने तटस्थ रुख अपनाया है, लेकिन भारत ने अवसर देखा। भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “हम अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। हमारी आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत हैं।”
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव: फायदे और नुकसान
ट्रंप समर्थकों का मानना है कि यह टैरिफ अमेरिकी उद्योगों को पुनर्जीवित करेगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर में, जहां चीन से 40% पार्ट्स आते हैं, अब घरेलू उत्पादन बढ़ सकता है। ऊर्जा क्षेत्र में, दुर्लभ मिट्टी की कमी से बैटरी उत्पादन प्रभावित होगा, लेकिन ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से वैकल्पिक स्रोतों की बात की। हालांकि, अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने चेतावनी दी, “यह उपभोक्ताओं पर बोझ डालेगा। महंगाई बढ़ेगी और नौकरियां कम हो सकती हैं।”
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी किसानों को चीनी प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि चीन सोयाबीन और मकई के आयात पर रोक लगा सकता है। ट्रंप ने किसानों के लिए 50 अरब डॉलर की सब्सिडी का वादा किया है।
भारत और अन्य देशों के लिए अवसर: वैकल्पिक बाजार
यह संकट भारत के लिए सुनहरा अवसर है। भारत दुर्लभ मिट्टी के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है और अमेरिका को निर्यात बढ़ा सकता है। टाटा और रिलायंस जैसी कंपनियां पहले से ही वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर काम कर रही हैं। वियतनाम और मैक्सिको भी लाभान्वित होंगे।
विदेश नीति विशेषज्ञ सुनील खन्ना ने कहा, “ट्रंप का यह कदम ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति को तेज करेगा। भारत को अब क्विकली एक्शन लेना चाहिए।” भारतीय सरकार ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को तेज करने की योजना बनाई है।
भविष्य की संभावनाएं: क्या होगा आगे?
ट्रंप की यह कार्रवाई दोनों देशों के बीच वार्ता को मजबूत कर सकती है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन अनुमान है कि वे भी समान टैरिफ लगाएंगे। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा है। ट्रंप ने कहा, “मैं डील करने को तैयार हूं, लेकिन चीन को पहले झुकना होगा।”
यह घटना वैश्विक व्यापार को पुनर्परिभाषित कर रही है। अमेरिका अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में बढ़ रहा है, जबकि चीन अपनी वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश करेगा। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह समय रणनीतिक कदम उठाने का है। कुल मिलाकर, यह ‘टैरिफ युद्ध’ न केवल आर्थिक, बल्कि भू-राजनीतिक परिणामों का वाहक है, जो आने वाले महीनों में दुनिया को बदल सकता है।
