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by-Ravindra Sikarwar

24 सितंबर, 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और चीन पर रूस-यूक्रेन युद्ध को तेल खरीद के जरिए “प्रमुख वित्तपोषक” होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच कथित संघर्ष को रोका, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है। इस बयान ने भारत में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

ट्रम्प का बयान और भारत की स्थिति:
ट्रम्प ने अपने भाषण में कहा कि भारत और चीन द्वारा रूसी तेल की खरीद युद्ध को लंबा खींच रही है। हालांकि, उन्होंने भारत की रणनीतिक स्थिति को नजरअंदाज किया, जो ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति में संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत ने बार-बार तटस्थ रुख अपनाते हुए शांति वार्ता का समर्थन किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने जवाब में भारत को “उभरती महाशक्ति” करार देते हुए यूरोप से भारत के साथ संबंध मजबूत करने की अपील की।

शशि थरूर का जवाब:
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्रम्प के बयानों और अमेरिका की हालिया H-1B वीजा फीस वृद्धि ($100,000) पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “विपत्ति में अवसर” बताया, यह कहते हुए कि यह नीति भारतीय पेशेवरों की अमेरिका जाने की “दीवानगी” को कम करेगी। थरूर ने भारतीय-अमेरिकियों की “चुप्पी” पर भी सवाल उठाए, इसे कूटनीतिक और सामाजिक स्तर पर कमजोर प्रतिक्रिया माना।

सोशल मीडिया और आर्थिक प्रभाव:
ट्रम्प के बयान के बाद X पर #TrumpUNGA और #H1BVisaHike हैशटैग 50,000 से अधिक बार ट्रेंड किए। भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में $9.5 बिलियन की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि H-1B वीजा नीति से प्रतिभा पलायन पर असर पड़ सकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक औपचारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति और वैश्विक कूटनीति में संतुलन बनाए रखेगा।

पृष्ठभूमि और संदर्भ:
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध हैं, और तेल आयात भारत की ऊर्जा जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ट्रम्प का यह बयान वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है, लेकिन उनके दावों को कई विशेषज्ञों ने अतिशयोक्तिपूर्ण बताया। भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति और कूटनीति पर जोर दिया है, और हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है।

निष्कर्ष:
ट्रम्प का यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में नई बहस छेड़ सकता है, खासकर H-1B वीजा नीति और व्यापारिक तनावों के बीच। भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया और आर्थिक रणनीति इस स्थिति में महत्वपूर्ण होगी। X पर चल रही चर्चाएं और समाचार चैनलों की कवरेज इस मुद्दे को और गर्माएगी।