
नई दिल्ली: यूट्यूबर और कॉमेडियन समय रैना, जो पहले से ही अश्लील चुटकुलों के एक विवाद में कानूनी जांच का सामना कर रहे हैं, अब एक और संभावित कानूनी परेशानी में घिरते दिख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनके कुछ वीडियो में विकलांग व्यक्तियों का कथित तौर पर मजाक उड़ाने पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे “बहुत गंभीर मुद्दा” करार दिया है।
मुख्य बातें:
- विकलांगों का मजाक उड़ाने का आरोप: सुप्रीम कोर्ट में दायर एक आवेदन में आरोप लगाया गया है कि समय रैना ने अपने कुछ वीडियो में विकलांग व्यक्तियों का उपहास किया है।
- एसएमए रोगियों और अन्य विकलांगों पर आपत्तिजनक टिप्पणी: आवेदक, क्योर एसएमए फाउंडेशन, ने दावा किया है कि रैना ने अपने दो वीडियो में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) से पीड़ित मरीजों के इलाज का मजाक उड़ाया है। इसके अतिरिक्त, उन पर अंधे और टेढ़ी आंखों वाले व्यक्तियों के बारे में असंवेदनशील टिप्पणी करने का भी आरोप है।
- बड़े चलन की ओर इशारा: फाउंडेशन ने तर्क दिया है कि इस तरह की वीडियो क्लिपें एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा हैं, जहां विकलांग व्यक्तियों को “उपहास, दया या सार्वजनिक मनोरंजन” की वस्तु बना दिया जाता है।
- संवेदनशील मामले का उल्लेख: कथित तौर पर विवादित एक वीडियो में दो महीने के एक एसएमए रोगी पर टिप्पणी शामिल है, जिसे 16 करोड़ रुपये के जीवन रक्षक इंजेक्शन की आवश्यकता थी। यह वही मामला था जो पहले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जिसने 6 करोड़ रुपये के आयात शुल्क पर छूट देकर उपचार की सुविधा प्रदान की थी।
- सुप्रीम कोर्ट की चिंता: पॉडकास्टर्स रणवीर अल्लाहबादिया और आशीष चंचलानी द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान इस आवेदन का उल्लेख किया गया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति कोठीश्वर सिंह की पीठ ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मुद्दा है। हम इसे देखकर परेशान हैं।”
- अलग याचिका दायर करने का सुझाव: पीठ ने आवेदक को इस मामले में अपनी चिंताओं को विशेष रूप से संबोधित करने के लिए एक अलग याचिका दायर करने का सुझाव दिया, ताकि मांगी गई राहत पर स्वतंत्र रूप से बेहतर ढंग से विचार किया जा सके।
- वीडियो क्लिप और पक्षकार बनाने का निर्देश: न्यायमूर्ति कांत ने आवेदक के वकील से कहा कि वे संबंधित वीडियो क्लिप को रिकॉर्ड पर रखें और संबंधित व्यक्ति (समय रैना) को मामले में पक्षकार बनाने की प्रक्रिया शुरू करें। इससे आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
- अन्य सह-आरोपियों पर पूछताछ: सुनवाई के दौरान, अदालत ने रणवीर अल्लाहबादिया के पासपोर्ट जारी करने के अनुरोध पर भी विचार किया। पीठ ने अल्लाहबादिया का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अभिनव चंद्रचूड़ से कहा कि वे एक आवेदक द्वारा अपने सह-आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर ध्यान दें। पीठ ने यह भी पूछा कि क्या उन्हें किसी अन्य सह-आरोपी के बारे में जानकारी है जो जांच एजेंसियों के समक्ष पेश नहीं हुआ है।
विस्तृत समाचार:
1. विकलांग व्यक्तियों पर समय रैना की आपत्तिजनक टिप्पणियां:
क्योर एसएमए फाउंडेशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर आवेदन में कॉमेडियन समय रैना पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फाउंडेशन का दावा है कि रैना ने अपने दो अलग-अलग वीडियो में विकलांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाया है, जिससे उनकी गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंची है। विशेष रूप से, आवेदन में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) से पीड़ित मरीजों के इलाज के तरीके का उपहास करने का आरोप लगाया गया है। एसएमए एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है जो मांसपेशियों की कमजोरी और प्रगतिशील पक्षाघात का कारण बनती है। इसके अतिरिक्त, रैना पर अंधे व्यक्तियों और जिनकी आंखें तिरछी हैं, उनके शारीरिक स्वरूप को लेकर असंवेदनशील और अपमानजनक टिप्पणियां करने का भी आरोप है।
2. क्योर एसएमए फाउंडेशन की हस्तक्षेप याचिका:
क्योर एसएमए फाउंडेशन, जो एसएमए रोगियों के अधिकारों और कल्याण के लिए काम करने वाला एक संगठन है, ने इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। फाउंडेशन ने अदालत से आग्रह किया है कि वह ऑनलाइन सामग्री के लिए प्रस्तावित नियामक ढांचे के तहत विकलांग व्यक्तियों के लिए विशिष्ट सुरक्षा उपायों को शामिल करने का निर्देश दे। उनका तर्क है कि वर्तमान कानूनी ढांचा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विकलांग व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव और अपमानजनक सामग्री को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में अपर्याप्त है। फाउंडेशन का मानना है कि समय रैना की कथित टिप्पणियां न केवल व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक हैं, बल्कि समाज में विकलांग व्यक्तियों के प्रति नकारात्मक और पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देती हैं।
3. सुप्रीम कोर्ट की गंभीर चिंता और प्रतिक्रिया:
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और समय रैना की कथित टिप्पणियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालत इस तरह की सामग्री को देखकर “परेशान” है और इसे “बहुत गंभीर मुद्दा” मानती है। अदालत की यह कड़ी प्रतिक्रिया विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है। पीठ ने आवेदक को इस मामले में अपनी शिकायतों को विस्तार से बताने के लिए एक अलग याचिका दायर करने का सुझाव दिया है। यह सुझाव इंगित करता है कि अदालत इस मुद्दे की गंभीरता को पहचानती है और इस पर विशेष ध्यान देना चाहती है।
4. संवेदनशील एसएमए रोगी के मामले का उल्लेख:
आवेदन में एक विशेष रूप से संवेदनशील मामले का उल्लेख किया गया है, जिसमें समय रैना ने कथित तौर पर दो महीने के एक एसएमए रोगी पर टिप्पणी की थी, जिसे जीवन बचाने के लिए 16 करोड़ रुपये के एक महंगे इंजेक्शन की आवश्यकता थी। यह वही मामला था जो पहले सुप्रीम कोर्ट में आया था, जहां अदालत ने मानवीय आधार पर 6 करोड़ रुपये के आयात शुल्क पर छूट दी थी। अंततः, उस बच्चे के लिए आवश्यक धन क्राउडफंडिंग के माध्यम से जुटाया गया था। इस मामले का उल्लेख करके, आवेदक ने यह दर्शाने की कोशिश की है कि रैना ने न केवल विकलांगता का मजाक उड़ाया, बल्कि एक ऐसे बच्चे की मजबूरी का भी संवेदनहीनता से उपहास किया जिसे जीवन और मृत्यु के बीच जूझना पड़ रहा था।
5. रणवीर अल्लाहबादिया मामले के दौरान उल्लेख और अन्य सह-आरोपियों पर पूछताछ:
यह मामला पॉडकास्टर्स रणवीर अल्लाहबादिया और आशीष चंचलानी से जुड़े एक अलग मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने अल्लाहबादिया के पासपोर्ट जारी करने के अनुरोध पर विचार करते हुए, उनके वकील से उनके सह-आरोपी (समय रैना) के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर ध्यान देने को कहा। पीठ ने यह भी पूछताछ की कि क्या उन्हें किसी अन्य सह-आरोपी के बारे में जानकारी है जो अभी तक जांच एजेंसियों के सामने पेश नहीं हुआ है। यह इंगित करता है कि अदालत न केवल समय रैना के खिलाफ आरोपों की जांच कर रही है, बल्कि इस मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका पर भी ध्यान दे रही है।
6. आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना:
सुप्रीम कोर्ट ने आवेदक के वकील को निर्देश दिया है कि वे कथित आपत्तिजनक वीडियो क्लिप को रिकॉर्ड पर रखें और समय रैना को मामले में औपचारिक रूप से पक्षकार बनाएं। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो समय रैना के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करता है। अदालत द्वारा वीडियो साक्ष्य की समीक्षा करने और रैना को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद, यह तय किया जाएगा कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जानी चाहिए या नहीं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विकलांग व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक सामग्री के मुद्दे पर एक मजबूत संदेश भेजती है।
