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by-Ravindra Sikarwar

मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश): कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर गंगा स्नान के लिए वाराणसी की ओर जा रहे छह भक्तों की जान एक रेल हादसे में चली गई। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चूनार जंक्शन रेलवे स्टेशन पर सुबह करीब 9:15 बजे गोमो-प्रयागराज एक्सप्रेस से उतरते ही भक्तों ने गलत दिशा से पटरी पार करने की कोशिश की, तभी कल्का मेल एक्सप्रेस ने उन्हें कुचल दिया। इस भयावह घटना में कई अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। यह हादसा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुई ट्रेन टक्कर के महज एक दिन बाद घटित हुआ, जिसने रेल सुरक्षा को लेकर पूरे देश में चिंता की लहर पैदा कर दी है।

हादसे का क्रम: एक पल की लापरवाही ने छीनी कई जानें
चूनार स्टेशन, जो प्रयागराज-मिर्जापुर रेल लाइन पर स्थित एक व्यस्त जंक्शन है, कार्तिक पूर्णिमा के दौरान लाखों भक्तों का आवागमन केंद्र बन जाता है। बुधवार सुबह गोमो-प्रयागराज एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर रुकी, जिसमें सवार अधिकांश भक्त सोनभद्र और चोपन क्षेत्र से आ रहे थे। वे गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए वाराणसी पहुंचने वाले थे। ट्रेन से उतरते ही भीड़ में अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि प्लेटफॉर्म नंबर 3 की ओर जाने के लिए उन्हें ओवर ब्रिज या अंडरपास का उपयोग करना था। लेकिन जल्दबाजी में कई भक्त सीधे पटरी पार करने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कल्का मेल एक्सप्रेस तेज रफ्तार से आ रही थी और प्लेटफॉर्म नंबर 3 से गुजर रही थी। ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक तो लगाई, लेकिन दूरी इतनी कम थी कि ट्रेन के इंजन ने भक्तों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में कम से कम छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन से चार अन्य गंभीर रूप से जख्मी हो गए। शव इतने क्षत-विक्षत हो गए कि कुछ की पहचान करना मुश्किल हो गया। एक चश्मदीद ने बताया, “भीड़ इतनी थी कि लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। ट्रेन का हॉर्न सुनते ही चीख-पुकार मच गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।” स्टेशन पर अफरा-तफरी का आलम था, और यात्रियों ने घंटों तक इंतजार किया क्योंकि ट्रेन सेवाएं ठप हो गईं।

मृतकों में ज्यादातर सोनभद्र जिले के निवासी थे, जो कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र गंगा स्नान के लिए निकले थे। पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने मृतकों की पहचान के लिए आधार कार्ड और मोबाइल फोन की जांच शुरू कर दी है। घायलों को मिर्जापुर जिला अस्पताल और वाराणसी के महात्मा गांधी केंद्रीय अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। एक चिकित्सक ने कहा, “कई घायलों में सिर और छाती पर गंभीर चोटें हैं, उनकी हालत चिंताजनक है।”

कारण और जिम्मेदारी: भीड़ प्रबंधन की कमी ने बिगाड़ा खेल
प्रारंभिक जांच में पता चला कि हादसा गलत दिशा से पटरी पार करने और स्टेशन पर अपर्याप्त साइनेज के कारण हुआ। चूनार स्टेशन पर ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके चलते यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि त्योहार के दौरान स्टेशन पर सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई थी, लेकिन सुबह की भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ट्रेन ड्राइवर ने ग्रीन सिग्नल पर ही गति बढ़ाई थी, लेकिन पैदल यात्रियों की मौजूदगी का अंदाजा नहीं था।” यह घटना रेलवे की उन कमियों को उजागर करती है, जहां फुट ओवर ब्रिज और अंडरपास की कमी से ऐसी दुर्घटनाएं आम हो गई हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया: सीएम योगी की त्वरित कार्रवाई
इस हादसे की खबर मिलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहन जांच के आदेश जारी कर दिए। उन्होंने मिर्जापुर के जिलाधिकारी और एसएसपी को तुरंत मौके पर पहुंचने और राहत कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएम ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, घायलों के लिए मुफ्त इलाज और परिजनों को सरकारी नौकरी की पेशकश की घोषणा की। योगी ने ट्विटर पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “यह दुखद घटना बेहद पीड़ादायक है। प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।”

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो हादसे के कारणों की पड़ताल करेगी। रेलवे ने प्रभावित यात्रियों के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 139 जारी किया है। एनडीआरएफ की एक टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है, हालांकि बचाव कार्य स्थानीय स्तर पर ही पूरा हो गया। स्टेशन पर रेलवे पुलिस और जीआरपी ने पीएमओ (पोस्ट मॉर्टम) प्रक्रिया शुरू कर दी है।

व्यापक प्रभाव: त्योहार की खुशी पर साया, रेल सुरक्षा पर सवाल
कार्तिक पूर्णिमा, जो हिंदू कैलेंडर का महत्वपूर्ण पर्व है, गंगा स्नान और चंद्र पूजा के लिए जाना जाता है। इस दौरान उत्तर प्रदेश में लाखों भक्त वाराणसी, प्रयागराज और मिर्जापुर पहुंचते हैं, जिससे रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ उमड़ आती है। इस हादसे ने त्योहार की तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है। सोनभद्र और चोपन के ग्रामीण इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई, जहां मृतकों के परिवार वाले सदमे में हैं। एक परिजन ने कहा, “हमारा भाई पूजा के लिए गया था, लेकिन लौटने की खबर ही नहीं आई। सरकार न्याय दे।”

यह घटना भारत में रेल दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को रेखांकित करती है। 2023-24 में रेलवे ने 40 से अधिक ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट की, जिनमें पैदल यात्रियों की लापरवाही मुख्य कारण रही। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेशनों पर सीसीटीवी, वॉइस अलर्ट सिस्टम और भीड़ प्रबंधन प्रशिक्षण की कमी घातक साबित हो रही है। विपक्षी दलों ने भी सरकार से रेलवे बजट में सुरक्षा पर अधिक खर्च की मांग की है।

भविष्य के लिए सबक: सुरक्षा पहले, जागरूकता जरूरी
इस त्रासदी से सीख मिलती है कि त्योहारों के दौरान यात्रियों को ओवर ब्रिज का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। रेलवे ने चेतावनी जारी की है कि पटरी पार करने पर जुर्माना लगेगा। आम यात्रियों को भी सलाह दी जाती है कि ट्रेन शेड्यूल चेक करें और भीड़ से बचें। हेल्पलाइन 139 पर संपर्क कर नवीनतम अपडेट लिए जा सकते हैं।

यह हादसा पूरे देश को झकझोर गया है, और प्रभावित परिवारों के प्रति सभी वर्गों से संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। उम्मीद है कि इस जांच से ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा, और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्व सुरक्षित रहें।