by-Ravindra Sikarwar
हाल ही में प्रौद्योगिकी जगत से जुड़ी तीन प्रमुख खबरें सामने आई हैं, जिनमें अमेरिकी वीज़ा नियमों में बदलाव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का रोजगार पर प्रभाव और सोशल मीडिया पर राजनीतिक हस्तियों की फैक्ट-चेकिंग (तथ्य जाँच) शामिल है।
अमेरिका के नए वीज़ा नियम:
संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने वीज़ा नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य वीज़ा आवेदकों की जाँच को और कड़ा करना है।
- अनिवार्य व्यक्तिगत इंटरव्यू: पहले कुछ समूहों, जैसे बच्चों और बुजुर्गों, को व्यक्तिगत इंटरव्यू से छूट मिल जाती थी, लेकिन अब कई श्रेणियों के आवेदकों को अपने गृह देश में अमेरिकी दूतावास में इंटरव्यू देना अनिवार्य होगा। इससे विदेश में जल्दी अपॉइंटमेंट लेने का विकल्प समाप्त हो गया है।
- सोशल मीडिया की जानकारी: कुछ वीज़ा श्रेणियों के लिए आवेदकों को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे अधिकारियों को आवेदकों की पहचान और उनकी स्वीकार्यता की जाँच करने में मदद मिलेगी। इस कदम से ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी बढ़ गई है।
- बढ़ी हुई निगरानी: ये नए नियम, सोशल मीडिया की जानकारी की माँग के साथ, यह दर्शाते हैं कि अमेरिका संभावित वीज़ा आवेदकों की जाँच और निगरानी के स्तर को बढ़ा रहा है।
AI का रोजगार पर प्रभाव:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रही है, जिससे जहाँ कुछ नौकरियाँ खतरे में हैं, वहीं नई संभावनाएँ भी पैदा हो रही हैं।
- कार्य स्वचालन (Automation): AI कई दोहराए जाने वाले और मैनुअल कामों को स्वचालित कर रहा है, जिससे विभिन्न उद्योगों में दक्षता और उत्पादकता बढ़ी है।
- नई नौकरियों का सृजन: हालाँकि AI कुछ नौकरियों को खत्म कर रहा है, लेकिन यह नई नौकरियों की माँग भी पैदा कर रहा है, जैसे AI विशेषज्ञ और डेटा वैज्ञानिक। AI मानव क्षमताओं को भी बढ़ा सकता है, जिससे कर्मचारियों को अधिक जटिल और रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
- करियर प्लेटफॉर्म: आउटस्पार्क जैसे प्लेटफॉर्म AI का उपयोग करके नौकरी ढूँढने वालों की मदद कर रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म रिज्यूमे बनाने, प्रोफाइल को बेहतर बनाने और नेटवर्किंग में सहायता करते हैं।
सोशल मीडिया पर राजनीतिक हस्तियों की तथ्य जाँच:
गलत सूचना और डीपफेक के बढ़ते खतरे के कारण सोशल मीडिया पर राजनीतिक हस्तियों के बयानों की जाँच करना एक महत्वपूर्ण काम बन गया है।
- सत्यापन की आवश्यकता: तथ्य जाँच करने वाले प्लेटफॉर्म सक्रिय रूप से सोशल मीडिया और समाचारों की निगरानी करते हैं, ताकि सार्वजनिक हस्तियों द्वारा फैलाई गई गलत जानकारी की पहचान कर सकें और उसे सत्यापित कर सकें।
- गलत सूचना से लड़ने में AI की भूमिका: तथ्य जाँचकर्ताओं की मदद के लिए AI तकनीकों का विकास किया जा रहा है। ये तकनीकें टेक्स्ट और इमेज दोनों में हेरफेर की गई सामग्री की पहचान करने में सक्षम होंगी।
- डीपफेक का खतरा: AI के तेजी से विकास का मतलब है कि डीपफेक (वास्तविक लगने वाले नकली वीडियो, ऑडियो और छवियाँ) आसानी से बनाए जा सकते हैं। इससे राजनीतिक बयानों की सत्यता की जाँच करना और एक निष्पक्ष राजनीतिक माहौल बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
