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By: Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन देश की राजनीति उस वक्त पूरी तरह गरमा गई, जब आधी रात के बाद राज्यसभा से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G Ram G विधेयक, 2025 पारित कर दिया गया। इस फैसले ने न केवल सदन के भीतर तीखी बहस और विरोध को जन्म दिया, बल्कि संसद परिसर को भी आंदोलन का केंद्र बना दिया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद पूरी रात धरने पर बैठे रहे, जबकि विपक्ष ने सरकार पर गरीबों, किसानों और मजदूरों के अधिकारों पर चोट करने का गंभीर आरोप लगाया।

गुरुवार देर रात लगभग 12:30 बजे यह विधेयक राज्यसभा में ध्वनिमत से पास हुआ। हालांकि इससे पहले विपक्षी दलों ने भारी हंगामा किया और इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की। मांग स्वीकार न होने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति में बिल पारित होने को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

बिल के पारित होते ही संसद परिसर में माहौल और गर्म हो गया। TMC सांसदों ने संसद भवन परिसर में धरना शुरू कर दिया, जो रातभर जारी रहा। उनका कहना था कि यह विधेयक महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी रोजगार गारंटी की मूल भावना पर हमला है। TMC नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कानून ग्रामीण गरीबों, किसानों और मजदूरों के हितों को कमजोर करेगा। शुक्रवार सुबह तक सांसद धरने पर बैठे रहे और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती रहीं।

सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक पर गंभीर और सार्थक चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने केवल आरोप लगाने और सदन की कार्यवाही बाधित करने का रास्ता चुना। मंत्री ने दावा किया कि VB-G Ram G विधेयक ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाना है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया इससे बिल्कुल उलट रही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश की जनता इस विधेयक को कभी स्वीकार नहीं करेगी और यह फैसला गरीबों के खिलाफ है। कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने इसे मजदूरों के लिए “सबसे दुखद दिन” करार दिया। कांग्रेस के ही सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि यह लोकतंत्र पर एक धब्बा है और इसके जरिए गरीबों से उनके अधिकार छीने गए हैं। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक किसानों और मजदूरों के खिलाफ है और भविष्य में सरकार को इसे वापस लेना ही पड़ेगा।

यह उल्लेखनीय है कि यह विधेयक इससे एक दिन पहले लोकसभा में भी पारित हो चुका था। लोकसभा में करीब 14 घंटे तक लंबी बहस चली, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष सरकार की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्ष लगातार मांग करता रहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून को पहले सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाए, ताकि इसके हर पहलू की गहन समीक्षा हो सके। सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसके चलते टकराव और बढ़ गया।

VB-G Ram G विधेयक को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसके स्वरूप को लेकर है। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) की जगह नया ढांचा पेश करता है। सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण रोजगार को अधिक प्रभावी बनाएगा और काम के अवसर बढ़ाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, सालाना रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 की जाएगी। इसके साथ ही फंड शेयरिंग का नया फॉर्मूला तय किया गया है, जिसमें सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 60:40 रहेगा, जबकि पूर्वोत्तर, हिमालयी राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 90:10 होगा। इसके अलावा, कृषि बुवाई और कटाई के मौसम में राज्यों को 60 दिन की विशेष अवधि घोषित करने की अनुमति भी दी गई है।

सरकार जहां इस विधेयक को ग्रामीण भारत के लिए एक नई शुरुआत बता रही है, वहीं विपक्ष इसे गांधीजी की रोजगार गारंटी की आत्मा के खिलाफ कदम मान रहा है। आधी रात में हुए इस फैसले और उसके बाद हुए विरोध ने यह साफ कर दिया है कि VB-G Ram G विधेयक आने वाले दिनों में भी सियासी बहस और टकराव का बड़ा मुद्दा बना रहेगा।