By: Ravindra Sikarwar
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर स्थित प्रसिद्ध और प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर में अब श्रद्धालुओं को पूजा-दर्शन के लिए शालीन और मर्यादित कपड़े पहनकर ही आना होगा। मंदिर ट्रस्ट और प्रबंधन समिति ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है ताकि मंदिर की पवित्रता, मर्यादा और धार्मिक परंपराओं का पूर्ण सम्मान बना रहे। इस नियम को लागू करने के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश द्वार, मुख्य मार्ग और दर्शन स्थल के आसपास बड़े-बड़े पोस्टर, बैनर और सूचना पट्ट लगाए गए हैं, जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि अश्लील, छोटे या अनुचित कपड़े पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
खेड़ापति हनुमान मंदिर ग्वालियर की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सदियों पुराना यह मंदिर शहर के बीचोबीच स्थित है और रोजाना सैकड़ों-हजारों भक्त यहां हनुमान जी के दर्शन करने आते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि कुछ युवा और पर्यटक आधुनिक फैशन के नाम पर बहुत छोटे कपड़े, शॉर्ट्स, स्लीवलेस टॉप, मिनी स्कर्ट या बॉडी हगिंग ड्रेस पहनकर मंदिर पहुंच रहे थे, जिससे बुजुर्ग श्रद्धालु और स्थानीय लोग असहज महसूस करते थे। कई बार तो इस तरह के कपड़ों में फोटो खिंचवाने और रील बनाने का सिलसिला भी चलता था, जो मंदिर की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा था।
इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने लंबी चर्चा के बाद यह नियम लागू करने का निर्णय लिया। समिति के अध्यक्ष और सदस्यों का कहना है कि मंदिर कोई पिकनिक स्पॉट या टूरिस्ट प्लेस नहीं है, बल्कि यह पूजा-उपासना और भक्ति का पावन स्थल है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को अपनी वेशभूषा से ही यह संदेश देना चाहिए कि वह ईश्वर के समक्ष श्रद्धा और विनम्रता के साथ उपस्थित हो रहा है। समिति ने पोस्टरों में साफ-साफ लिखा है कि महिलाओं के लिए साड़ी, सलवार-सूट या दुपट्टा ओढ़कर आना उचित रहेगा, वहीं पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा, धोती या पूरे कपड़े पहनना अनिवार्य होगा। शॉर्ट्स, बरमुडा, स्लीवलेस बनियान, टॉर्न जींस आदि पूरी तरह वर्जित किए गए हैं।
यह पहल शुरू होते ही स्थानीय लोगों और नियमित दर्शन करने वालों ने खुलकर सराहना की है। मंदिर के बाहर खड़े कई बुजुर्ग भक्तों ने बताया कि अब मंदिर में पहले जैसा पवित्र और शांत माहौल रहेगा। एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “हम तो घर से ही साफ-सुथरे और पूरी तरह ढके कपड़े पहनकर आते हैं, लेकिन कुछ लड़कियां-लड़के फैशन के चक्कर में मंदिर की मर्यादा भूल जाते हैं। यह नियम बहुत जरूरी था।” युवाओं ने भी इस कदम का स्वागत किया है। एक कॉलेज छात्र ने कहा कि इससे न केवल धार्मिक स्थल की गरिमा बचेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी संस्कार और मर्यादा का सही संदेश मिलेगा।
दरअसल, देश के कई बड़े मंदिरों में इस तरह के ड्रेस कोड पहले से ही लागू हैं। तिरुपति बालाजी, वैष्णो देवी, जगन्नाथपुरी, सोमनाथ, अमरनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी श्रद्धालुओं से शालीन वेशभूषा की अपील की जाती है और कई जगह तो सख्ती से लागू भी किया जाता है। ग्वालियर का खेड़ापति हनुमान मंदिर भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। समिति ने यह भी घोषणा की है कि जो भक्त अनजाने में गलत कपड़ों में आ जाएं, उन्हें मंदिर की ओर से दुपट्टा, शॉल या चादर उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे उसे ओढ़कर दर्शन कर सकें। किसी को भी बिना वजह वापस न लौटाया जाए, यह मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया गया है।
मंदिर समिति के सचिव ने बताया कि आने वाले दिनों में इस नियम को और सख्ती से लागू किया जाएगा। प्रवेश द्वार पर स्वयंसेवक तैनात रहेंगे जो भक्तों को प्यार से समझाएंगे और जरूरत पड़ी तो चादर-दुपट्टा भी उपलब्ध करवाएंगे। साथ ही सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार पत्रों के माध्यम से इस नियम की व्यापक जानकारी दी जा रही है ताकि कोई भी भक्त अनजाने में परेशान न हो।
ग्वालियर शहर के लोगों का मानना है कि यह कदम न केवल खेड़ापति हनुमान मंदिर की गरिमा बढ़ाएगा बल्कि पूरे शहर के अन्य मंदिरों और धार्मिक स्थलों के लिए एक मिसाल बनेगा। आज के दौर में जब पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे प्रयास हमारी सनातन परंपराओं और संस्कारों को जीवित रखने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
