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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारत सरकार ने टिकटॉक (TikTok) के दोबारा शुरू होने की अफवाहों को खारिज कर दिया है, जबकि दूसरी ओर, एक नए कानून के बाद कई लोकप्रिय फैंटेसी गेमिंग ऐप्स ने पेड गेम्स बंद कर दिए हैं।

भारत में टिकटॉक की वापसी की अफवाहें खारिज:
हाल ही में, सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल रही थी कि भारत में टिकटॉक पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। इन अफवाहों को लेकर सरकार की ओर से एक बयान जारी किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि टिकटॉक पर लगा प्रतिबंध जारी है और इस संबंध में कोई भी फैसला नहीं लिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि टिकटॉक और कुछ अन्य चीनी ऐप्स पर राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से 2020 में लगाया गया प्रतिबंध बरकरार है। मंत्रालय ने नागरिकों से ऐसी अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

टिकटॉक को 2020 में भारत-चीन सीमा पर तनाव के बाद 59 चीनी ऐप्स के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जुड़ी चिंताओं के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था। भारत में इस ऐप के करोड़ों उपयोगकर्ता थे और यह मनोरंजन के लिए एक प्रमुख मंच बन गया था।

फैंटेसी गेमिंग ऐप्स ने बंद किए पेड गेम्स:
संसद द्वारा पारित एक नए कानून, ऑनलाइन गेमिंग नियमन विधेयक (Online Gaming Regulation Bill) के बाद, देश में कई फैंटेसी गेमिंग कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म पर पेड गेम्स को बंद कर दिया है। इन कंपनियों में लोकप्रिय गेमिंग प्लेटफॉर्म ड्रीम11 (Dream11) भी शामिल है। यह विधेयक ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स लगाने और उसे नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

नए कानून के तहत, उन सभी ऑनलाइन गेम्स को प्रतिबंधित किया गया है जिनमें वित्तीय लाभ के लिए सट्टेबाजी या जुआ शामिल है। विधेयक में ‘ऑनलाइन गेमिंग’ और ‘गेम ऑफ स्किल’ (कौशल-आधारित खेल) के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। Dream11 और My11Circle जैसे फैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप्स खुद को कौशल-आधारित खेल मानते हैं। हालांकि, नए नियमों को लेकर अभी भी स्पष्टता की कमी है, जिसके कारण इन ऐप्स ने फिलहाल पेड गेम्स को निलंबित करने का फैसला किया है। इस कदम से गेमिंग उद्योग में अनिश्चितता का माहौल बन गया है और कई छोटी कंपनियां भी प्रभावित हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उद्योग में पारदर्शिता लाने और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी था। हालांकि, गेमिंग कंपनियों ने सरकार से इस कानून को लेकर और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।