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By: Ravindra Sikarwar

जबलपुर जिले के पनागर थाना क्षेत्र के एक गाँव में गुरुवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब ग्रामीणों ने घर के ठीक पीछे बने पुराने कुएँ में एक युवती का शव तैरते देखा। मृतका की पहचान 22 वर्षीय प्रियंका मेहरा (बदला हुआ नाम) के रूप में हुई है, जो पिछले काफी समय से अवसाद (डिप्रेशन) की समस्या से जूझ रही थी। घटना की सूचना मिलते ही पनागर पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कुएँ से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रथम दृष्टया पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, क्योंकि युवती के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले और न ही कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है।

परिजनों के अनुसार, बुधवार रात को पूरा परिवार एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने शहर की तरफ गया था। प्रियंका ने खुद ही घर पर रुकने की इच्छा जताई थी। उसने कहा था कि उसे नींद नहीं आ रही और वह आराम कर लेगी। परिवार वाले रात करीब 11 बजे निकले थे और सुबह लौटने का प्लान था। लेकिन गुरुवार तड़के करीब 6 बजे जब पड़ोस के लोग कुएँ पर पानी भरने आए तो उन्होंने पानी में कुछ असामान्य दिखाई दिया। नजदीक जाकर देखा तो युवती का शव पानी में तैर रहा था। आनन-फानन में ग्राम प्रधान और अन्य ग्रामीणों को खबर की गई। कुछ देर में पुलिस भी पहुँच गई।

परिवार का कहना है कि प्रियंका पिछले दो-तीन साल से डिप्रेशन की गंभीर समस्या से गुजर रही थी। उसका इलाज जबलपुर के एक निजी मनोचिकित्सक से चल रहा था। कभी-कभी दवाइयाँ लेने के बाद भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं दिखता था। घरवाले बताते हैं कि वह अक्सर अकेले में रोती रहती थी और रात में नींद नहीं आती थी। कुछ महीने पहले उसने एक बार कलाई पर ब्लेड से निशान भी बनाए थे, जिसके बाद परिवार ने उसे और सतर्कता से रखना शुरू किया था, लेकिन इस बार उसने किसी को कुछ नहीं बताया। शादी में जाने से पहले भी वह सामान्य व्यवहार कर रही थी, किसी को शक नहीं हुआ कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी।

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर कुएँ के आसपास के इलाके की छानबीन की। कुएँ का मुहाना खुला हुआ था और उसमें सीढ़ियाँ भी बनी हुई हैं, जिससे अंदाजा होता है कि युवती खुद पैदल नीचे उतरी और फिर पानी में कूद गई। मोबाइल फोन उसका कमरे में ही मिला, जिसमें आखिरी बार रात 12:30 बजे तक कुछ गाने सुने गए थे। पुलिस ने मोबाइल को कब्जे में लेकर उसकी कॉल डिटेल और चैट हिस्ट्री खंगालना शुरू कर दिया है। फिलहाल किसी बाहरी दखल या दबाव की कोई बात सामने नहीं आई है। थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट में यदि कोई और बात सामने आती है तो उसे ध्यान में रखा जाएगा, वरना मामला आत्महत्या का ही माना जाएगा।

ग्रामीणों ने बताया कि प्रियंका पढ़ी-लिखी और शांत स्वभाव की लड़की थी। उसने बीकॉम तक की पढ़ाई की थी, लेकिन नौकरी की तलाश में बार-बार असफलता मिलने से वह पहले से ही परेशान रहती थी। ऊपर से कुछ पारिवारिक विवाद भी थे, जिनके चलते उसका मानसिक स्वास्थ्य लगातार खराब होता जा रहा था। गाँव में कई लोग यह भी कह रहे हैं कि आजकल की युवा पीढ़ी पर पढ़ाई, नौकरी और सोशल मीडिया का इतना दबाव है कि छोटी-छोटी बातें भी उन्हें तोड़ देती हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा छेड़ दी है। कई लोग कह रहे हैं कि परिवार को पहले ही किसी काउंसलर की मदद लेनी चाहिए थी या उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए था।

पुलिस अब मर्ग कायम कर आगे की जाँच कर रही है। परिजन सदमे में हैं और अभी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। गाँव में मातम पसरा हुआ है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठा रही है कि डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारी को हम अब भी हल्के में लेते हैं और इसके शिकार लोग चुपके से इतने बड़े कदम उठा लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सही इलाज और परिवार का साथ ऐसे हादसों को रोक सकता है।