by-Ravindra Sikarwar
घरेलू क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने ‘गंभीर चोट लगने पर खिलाड़ी का विकल्प’ (Serious Injury Replacement) नियम लागू किया है। यह नियम 2025-26 के घरेलू सीज़न से लागू होगा। यह फैसला हाल ही में भारत और इंग्लैंड के बीच हुई टेस्ट सीरीज़ में ऋषभ पंत और क्रिस वोक्स जैसे खिलाड़ियों को लगी गंभीर चोटों के बाद लिया गया है।
नियम के प्रमुख बिंदु
- चोट की गंभीरता: यह नियम केवल उन खिलाड़ियों पर लागू होगा जिन्हें खेल के दौरान बाहरी चोट (जैसे फ्रैक्चर, गहरा कट, या डिसलोकेशन) लगी हो, जिसकी वजह से वे मैच में आगे नहीं खेल सकते।
- किस तरह के मैच में लागू: यह नियम केवल घरेलू मल्टी-डे टूर्नामेंटों जैसे रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, और सीके नायडू ट्रॉफी (अंडर-19) में लागू होगा। यह नियम फिलहाल सफेद गेंद वाले टूर्नामेंटों (जैसे सैयद मुश्ताक अली और विजय हजारे ट्रॉफी) या आईपीएल पर लागू नहीं होगा।
- विकल्प का चुनाव: घायल खिलाड़ी की जगह ‘लाइक-फॉर-लाइक’ (एक जैसा) खिलाड़ी ही लिया जा सकता है। यह विकल्प उसी खिलाड़ी को मिलेगा जिसका नाम पहले ही टॉस के समय अतिरिक्त खिलाड़ियों की लिस्ट में दिया गया हो।
- विकेटकीपर के लिए छूट: अगर किसी मैच में विकेटकीपर गंभीर रूप से घायल हो जाता है और नामित अतिरिक्त खिलाड़ियों में कोई दूसरा विकेटकीपर नहीं है, तो मैच रेफरी बाहर से एक और विकेटकीपर लाने की अनुमति दे सकता है।
- अधिकार और निर्णय: मैच रेफरी ही अंतिम निर्णय लेगा कि चोट कितनी गंभीर है और क्या विकल्प दिया जाना चाहिए। रेफरी डॉक्टर और ऑन-फील्ड अंपायरों से सलाह लेगा। रेफरी का फैसला अंतिम होगा और उस पर कोई अपील नहीं की जा सकती।
- नियमों का स्थानांतरण: अगर घायल खिलाड़ी पर कोई चेतावनी, दंड या निलंबन लगा हुआ है, तो ये सभी नियम विकल्प खिलाड़ी पर भी लागू होंगे।
- रिकॉर्ड: मैच के रिकॉर्ड में घायल खिलाड़ी और उसके विकल्प, दोनों के नाम शामिल होंगे।
यह नियम भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक बड़ा बदलाव है, जो टीमों को मैच के बीच में खिलाड़ी कम होने के नुकसान से बचाएगा। इससे टीमों को एक निष्पक्ष मुकाबला खेलने का मौका मिलेगा।
