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by-Ravindra Sikarwar

सुप्रीम कोर्ट बिहार में मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे कई योग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसमें निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के चलते कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे उनके मताधिकार का हनन हुआ है।

चुनाव आयोग का रुख:
इस मामले पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अगर मतदाता सूची में कोई गलती हुई है, तो उसे ठीक करने के लिए वह पूरी तरह से तैयार है। आयोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह सभी शिकायतों की जांच करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी योग्य मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।

मुख्य बिंदु:

  • गलतियों को सुधारने की पेशकश: चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि वह किसी भी तरह की गलती को सुधारने के लिए तैयार है।
  • शिकायतों की जांच: आयोग ने सभी शिकायतों की जांच करने का भरोसा दिया है।
  • पुन: सत्यापन: कोर्ट के निर्देश पर, आयोग उन मामलों का पुन: सत्यापन कर सकता है जहां से नाम हटाए गए हैं।

यह मामला बिहार में आगामी चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए अत्यंत आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई यह सुनिश्चित करेगी कि मतदाता सूची में सभी योग्य नागरिकों के नाम सही ढंग से शामिल हों और चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।