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Report by: Ajit Kumar Thakur

Supaul : बिहार के सुपौल जिले में भू-राजस्व विभाग में बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सरकारी जमीन के अभिलेखों में हेराफेरी कर उसे निजी लाभ के लिए बदलने के आरोप में सदर अंचल के अंचल अधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कार्यपालक दंडाधिकारी नूतन कुमारी के लिखित आवेदन पर सुपौल थाना में कांड संख्या-218/2026 दर्ज कर पुलिस ने मामले की छानबीन तेज कर दी है।

सरकारी जमीन की प्रविष्टि में बड़ा खेल

Supaul मामले का खुलासा तब हुआ जब सरकारी जमीन के रिकॉर्ड की जांच की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सदर अंचल के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय नियमों को ताक पर रखकर सरकारी भूमि को गलत तरीके से निजी खातों में दर्ज कर दिया। आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि निजी हितों को साधने के लिए सरकारी संपत्ति की स्थिति में बदलाव किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व की हानि होने की आशंका है।

डिजिटल रिकॉर्ड और जमाबंदी में छेड़छाड़

Supaul आरोप केवल कागजी हेराफेरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन जमीन अभिलेख (Digital Records) में भी बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की बात सामने आई है।

  • जमाबंदी में बदलाव: पहले से दर्ज आधिकारिक जमाबंदी के विपरीत जाकर रिकॉर्ड में सुधार किया गया।
  • साक्ष्य मिटाने का प्रयास: वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए ऑनलाइन डेटा के साथ छेड़छाड़ कर उसे निजी व्यक्तियों के पक्ष में दिखाने का प्रयास किया गया। कार्यपालक दंडाधिकारी ने इन अनियमितताओं को बेहद गंभीर मानते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की थी।

प्रशासनिक महकमे में हड़कंप, जांच शुरू

Supaul थानाध्यक्ष ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि दर्ज एफआईआर के आधार पर पुलिस ने साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिया है। संबंधित अंचल कार्यालय से दस्तावेज मांगे गए हैं और आईटी विशेषज्ञों की मदद से ऑनलाइन पोर्टल के लॉग्स (Logs) की भी जांच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि डिजिटल छेड़छाड़ किस स्तर पर और किसके लॉगिन से हुई है।

इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या रिकॉर्ड में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस मामले की गहराई से जांच हुई, तो अंचल कार्यालय के कई अन्य बड़े सिंडिकेट का खुलासा हो सकता है।

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