By: Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली में 30 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग में प्रमुख अर्थशास्त्रियों और सेक्टोरल विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक आगामी यूनियन बजट 2026-27 की तैयारियों के अंतिम चरण में हुई, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम और अन्य वरिष्ठ सदस्यों के अलावा कई प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री जैसे शंकर आचार्य, अशीमा गोयल, एनआर भानुमूर्ति, धरमकीर्ति जोशी और मोनिका हलन शामिल हुए। बैठक का मुख्य थीम ‘आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत का एजेंडा’ रहा, जो देश की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को मजबूत करने पर केंद्रित था।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस चर्चा में स्पष्ट रूप से जोर दिया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प अब केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की साझा जन-आकांक्षा बन चुका है। उन्होंने कहा कि बजट निर्माण और नीति निर्धारण की प्रक्रिया हमेशा इस दूरगामी विजन से जुड़ी रहनी चाहिए। वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत को न केवल आंतरिक मजबूती हासिल करनी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभानी है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिशन मोड पर सुधारों की जरूरत पर बल दिया गया, ताकि लंबे समय तक आर्थिक वृद्धि बनी रहे और देश वैश्विक कार्यबल तथा बाजारों का प्रमुख केंद्र बने।
बैठक में अर्थशास्त्रियों ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने और निर्यात को विविधता प्रदान करने पर रणनीतिक सुझाव दिए। विशेष रूप से पूंजीगत व्यय (कैपेक्स), रोजगार सृजन, घरेलू बचत को प्रोत्साहन और उभरती चुनौतियों से निपटने पर गहन विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने 2025 को सुधारों का ऐतिहासिक वर्ष करार देते हुए कहा कि इस वर्ष किए गए क्रॉस-सेक्टोरल बदलावों – जैसे जीएसटी स्लैब रेशनलाइजेशन, नया इनकम टैक्स एक्ट और बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई – को आगे मजबूत करने से भारत सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रखेगा। इन सुधारों से निवेशक विश्वास बढ़ा है और नई अवसरों का सृजन हो रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करेंगी। यह बजट वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ जैसी चुनौतियों के बीच तैयार हो रहा है। चर्चा से संकेत मिलते हैं कि बजट में मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता, सस्टेनेबल विकास, रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां प्रमुखता से शामिल हो सकती हैं। सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने पर फोकस रहेगा, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, एआई और प्रोफेशनल सर्विसेज शामिल हैं। साथ ही, गरीबी से बाहर आए लगभग 25 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं – जैसे बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, स्किल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर – को पूरा करने पर जोर दिया जाएगा।
यह बैठक सरकार की परंपरागत बजट पूर्व परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें विभिन्न हितधारकों से सुझाव लिए जाते हैं। प्रधानमंत्री ने हाल ही में लिंक्डइन पर 2025 को सुधारों का मील का पत्थर बताया, जो पिछले 11 वर्षों की प्रगति पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन चर्चाओं से निकले विचार बजट को अधिक समावेशी और दूरदर्शी बनाएंगे, जिससे आम नागरिकों को रोजगार, निवेश और विकास के नए अवसर मिलेंगे। कुल मिलाकर, यह बैठक विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत और रणनीतिक कदम साबित होगी, जो आर्थिक स्थिरता और वैश्विक एकीकरण पर केंद्रित है।
