Sleemanabad Tunnel : प्रस्तावना मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के कृषि और सिंचाई परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की 270वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं, विशेषकर स्लीमनाबाद जल सुरंग (Tunnel), का कार्य अंतिम चरण में है। डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रशासनिक और वित्तीय बाधाओं को दरकिनार कर इन लंबित कार्यों को समय सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए ताकि किसानों को इसका अविलंब लाभ मिल सके।
स्लीमनाबाद टनल: इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना और प्रदेश की जीवनरेखा
Sleemanabad Tunnel बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन स्लीमनाबाद टनल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि देश की सबसे लंबी जल सुरंगों में से एक है। 11.952 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का लगभग 85 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बिना किसी पंप की सहायता के, प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण (Natural Flow) के माध्यम से नर्मदा के जल को आगे ले जाएगी।
विंध्य पर्वत श्रृंखला की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और उच्च भूजल स्तर जैसी चुनौतियों को आधुनिक तकनीक से मात देकर इस सुरंग का निर्माण किया गया है। यह टनल राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे लाइनों के नीचे से सुरक्षित रूप से गुजरती है, जो इसके निर्माण कौशल को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि कार्य पूर्ण होते ही भव्य उद्घाटन समारोह के साथ इसे राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा।
छह जिलों के 1450 गांवों की बदलेगी तकदीर
Sleemanabad Tunnel इस वृहद परियोजना का प्रभाव क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। बरगी बांध से निकलने वाली 197 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर (ट्रांस-वैली कैनाल) की जल वहन क्षमता 227 क्यूमेक है। इस परियोजना के पूरी तरह क्रियान्वित होने पर प्रदेश के छह प्रमुख जिलों— जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और रीवा के किसान लाभान्वित होंगे।
डेटा के अनुसार, लगभग 1,450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर भूमि को स्थाई सिंचाई की सुविधा प्राप्त होगी। पिछले दो वर्षों में इस कार्य में जो गति देखी गई है, वह अभूतपूर्व है। इस परियोजना से न केवल फसलों की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि भूजल स्तर में सुधार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को भी संवेदनशीलता के साथ पूरा किया गया है।
महत्वपूर्ण निर्णय और नई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
Sleemanabad Tunnel समत्व भवन में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने केवल पुरानी परियोजनाओं की समीक्षा ही नहीं की, बल्कि कई नई योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की:
- सेल्दामाल माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना: खंडवा जिले के गांवों के लिए 42.95 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।
- दूधी और खालवा परियोजनाएं: इन दोनों परियोजनाओं के कमांड क्षेत्र में वृद्धि के साथ-साथ इनके पुनरीक्षित बजट (क्रमशः 1925 करोड़ और 724 करोड़) को मंजूरी दी गई।
- आईएसपी-कालीसिंध और पावती चरण: मालवा और मध्य क्षेत्र की इन वृहद सिंचाई योजनाओं के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है, जिससे लाखों हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी।
- बदनावर और डोबी सिंचाई: सीहोर और धार क्षेत्रों के लिए भी करोड़ों रुपये की पुनरीक्षित लागत को स्वीकृति मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन स्पष्ट है— जल संसाधनों का अधिकतम और कुशल उपयोग। नर्मदा घाटी के इन कार्यों से मध्य प्रदेश ‘स्वर्णिम कृषि युग’ की ओर बढ़ रहा है। स्लीमनाबाद टनल का पूरा होना विंध्य और बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी।
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