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Shipra Aarti: सिंहस्थ कुंभ से पहले प्रशासन की व्यापक तैयारी, धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

By: Ishu Kumar

उज्जैन: धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ से पहले आस्था और संस्कृति को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। शिप्रा नदी के पावन रामघाट पर प्रतिदिन होने वाली शिप्रा आरती को अब वाराणसी की विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती की तर्ज पर भव्य, अनुशासित और सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया जाएगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए विस्तृत और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की है।

Shipra Aarti: रामघाट का पुनर्स्थापन और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार

उज्जैन में मंदिरों के विकास के बाद अब शिप्रा नदी और रामघाट के समग्र सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत रामघाट का पुनर्स्थापन किया जाएगा, जहां पुराने और क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाकर नए पत्थरों से घाट को सुदृढ़ बनाया जाएगा। घाट की संरचना को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का अनुभव मिल सके।

Shipra Aarti: आरती को मिलेगा भव्य और आध्यात्मिक स्वरूप

प्रशासन का उद्देश्य है कि शिप्रा आरती को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए आरती स्थल पर आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, भव्य मंच, पारंपरिक वेशभूषा और अनुशासित आयोजन पर विशेष जोर दिया जाएगा। स्वच्छता, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के सुव्यवस्थित आवागमन के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे, ताकि भीड़ प्रबंधन प्रभावी ढंग से हो सके।

धार्मिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य

उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और देशभर से बड़ी संख्या में भक्त शिप्रा आरती के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ में देश-विदेश से लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी को ध्यान में रखते हुए रामघाट और शिप्रा आरती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।

सिंहस्थ से पहले पूर्ण होंगे सभी कार्य

प्रशासन का संकल्प है कि सिंहस्थ कुंभ से पहले रामघाट के विकास और शिप्रा आरती से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध रूप से पूरे कर लिए जाएं। इससे उज्जैन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में भी वैश्विक मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा।

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